Mar 4, 2007

होली की ठिठोली के साथ समीर लाल जी को चिठ्ठा जन्‍म दिन की बधाई

बधाई देने हम भी आ गये,
जन्‍म दिन की मिठाई खाने आ गये,
बासी है मिठाई फफूदी पड़ी है,
खा के मिठाई मुझे उल्‍टी करनी पड़ी है।

चिठ्ठा के चककर मे चाय भी न पूछा,
मेरी इस बधाई कविता के कारण
समीर लाल जी ने
उड़न तश्‍तरी पर बैठने को न पूछा

उड़न तश्‍तरी पर बैठाने का गम नही,
कीडे पड़ी मिठाई देख कर
बर्थ डे पार्टी मे न बुलाऐ जाने का गम नही।

मिठाई न खाने से हम मस्‍त है,
जिसने भी खाया वह दस्‍त से पस्‍त है।
ब्‍लाग सलाग लिखते नही
क्‍योकि वे पाकिस्‍तान मे ब्‍यस्‍त है।


होली की शुभ कामनाऐ
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