बधाई देने हम भी आ गये,
जन्म दिन की मिठाई खाने आ गये,
बासी है मिठाई फफूदी पड़ी है,
खा के मिठाई मुझे उल्टी करनी पड़ी है।
चिठ्ठा के चककर मे चाय भी न पूछा,
मेरी इस बधाई कविता के कारण
समीर लाल जी ने
उड़न तश्तरी पर बैठने को न पूछा
उड़न तश्तरी पर बैठाने का गम नही,
कीडे पड़ी मिठाई देख कर
बर्थ डे पार्टी मे न बुलाऐ जाने का गम नही।
मिठाई न खाने से हम मस्त है,
जिसने भी खाया वह दस्त से पस्त है।
ब्लाग सलाग लिखते नही
क्योकि वे पाकिस्तान मे ब्यस्त है।
होली की शुभ कामनाऐ