Mar 19, 2007

वर्ष प्रतिपदा - भारतीयता का उत्‍सव

भारतीय संस्‍कृति के अनुसार वर्ष का प्रारम्‍भ चैत्र शुक्‍ल से होता है। यह सृष्टि के आरम्‍भ का दिन भी है। यह वैज्ञानिक तथा शास्‍त्रशुद्ध गणना है। इसकी काल गणना बड़ी प्रचीन है। सृष्टि के प्रारम्‍भ से अब तक 1 अरब, 95 करोड़, 58 लाख, 85 हजार, 106 वर्ष बीत चुके है। यह गणना ज्‍योतिष विज्ञान के द्वारा निर्मित है। आधुनिक वैज्ञानिक भी सृष्टि की उत्‍पत्ति का समय एक अरब वर्ष से अधिक बता रहे है। अपने देश में कई प्रकार की कालगणनाकी जाती है- युगाब्‍द(कलियुग का प्रारम्‍भ), श्री कृष्‍ण संवत्, शक संवत् आदि है।
चन्‍द्रमा की गति के साथ अपनी कालगणना क्‍यों जुड़ी? भोला भाला ग्रामीण भी चन्‍द्रमा की गति से परिचित है। वह जानता है कि आज पूर्णिमा है या द्वि‍तीया। इस प्रकार काल गणना हिन्‍दू जीवन के रोम-रोम एवं भारत के कण-कण से अत्‍यन्‍त गहराई से जुड़ी है। ठिठुरती ठंड मे पड़ने वाला ईसाई नववर्ष पहली जनवरी से भारतवंशियों का कोई सम्‍बन्‍ध नही है।
प्रतिपदा हमारे लिये क्‍यों महत्‍वपूर्ण है, इसके सामाजिक एवं ऐतिहासिक सन्‍दर्भ निम्‍न है-
1 मर्यादा पुरूषोत्‍तम श्रीराम का राज्‍याभिषेक।
2 मॉं दुर्गा की उपासना की नवरात्र व्रत का प्रारम्‍भ
3 युगाब्‍द(युधिष्‍ठिर संवत्) का आरम्‍भ
4 उज्‍जयिनी सम्राट- विक्रामादित्‍य द्वारा विक्रमी संवत् प्रारम्‍भ।
5 शालिवाहन शक् संवत् ( भारत सरकार का राष्‍ट्रीय पंचाग)
6 महर्षि दयानंद द्वारा आर्य समाज की स्‍थापना
7 संघ के संस्‍थापक केशव बलिराम हेडगेवार का जन्‍म दिन।
आप सभी को भारतीय नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऐं।
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