आज अप्रेल फूल दिवस है, यानि अंग्रेज भाईयों ने हम भारतीयों के लियें मूर्ख बनाने का दिन भी दिन भी निर्धारित कर गये है। मै इस दिवस को नही मानता हूँ, पर देशी हवा के बयार मे मूर्खाता का ऐसा प्रचलन हुआ है कि मै सोचने को मजबूर हूँ कि क्या इसकी भी आवाश्यकता ?
यह हमारी तुच्छ मानसिकता की सोच है कि हम न्यू इयर, वैलेंटाइन डे, अप्रेल फूल डे, जैसे अन्तार्राष्ट्रीय दिवस तो जो शोर से मनाते है। किन्तु हम कुछ अन्य इनसे भी ज्यादा महात्वपूर्ण दिवस क्यो भूल जाते है। मै पाश्चात संस्कृति अपनाने का विरोधी नही हूँ , विरोधी हूँ तो पाश्चात संस्कृति की गंदगी अपनाने का।
जब हम न्यू इयर, वैलेंटाइन डे, अप्रेल फूल डे मनाते है तो मनाऐ किन्तु हमने विश्व मातृ दिवस, विश्व पितृ दिवस, विश्व संगीत दिवस, विश्व फोटों ग्राफी दिवस, चिक्तिसक दिवस, पत्रकारिता दिवस, विश्व थ्रियेटर दिवस, अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस, अन्तार्राष्ट्रीस प्रेस स्वतन्त्रता दिवस, विश्व श्रमिक दिवस, विश्व विरासत दिवस, राष्ट्रीय युवा दिवस, विश्वमितव्ययिता दिवस, विश्व खाद्य दिवस और विश्व मांसाहार दिवस की ओर कभी ध्यान दिया ?
मैने यहॉं पर जिनते भी दिवस गिनाऐ है, उन सभी दिवसों का सम्बन्ध किसी ने किसी हिन्दी चिठ्ठाकार से अवश्य है। पर शोक और क्षोभ का विषय है कि कोई भी कभी भी इन सर्वाधिक मत्वपूर्ण दिवसों पर न तो कभी लिखा ही न ही बधाई का आदान प्रदान हुआ।
क्या हमने पाश्चात गंदगी को एकत्र करने का ठेका ले रखा है ? यह सोचनीय विषय है। आज मै नारद पर गया तो चारों दिशाओं मे मानवता के हत्यारे जार्ज बुश का चेहरा नजर आ रहा था। जैसा कि मुझे अनुमान तो था कि आज मूर्ख दिवस है पर इसे देख कर पक्का यकीन भी हो गया है। एक दो लेख को देखा तो मजाक मय ही महोल था। फिर मुझे लगा कहीं सभी के चिठ्ठे पर मूर्ख बनाने का अभियान न चल रहा हो। और कही किसी पर टिप्प्णी किया तो मूर्ख की श्रेणी में न खड़ाकर दिया जाये।
मैनें आज के दिन के सारे लेख जिनकी हेडिग नारद पर थी सभी एक साथ एक सामान्य सा वाक्य ( को पढ़ोगें तो मूर्ख बन जाओंग) जोड़ कर पढ़ना चालू किया तो
ग़ज़लें और कविताएँ इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
कविता सीखो हे कविराज… इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
धर्म के नाम पर - को पढ़ोगें तो मूर्ख बन जाओंगे
आरक्षण : चाहिये ही चाहिये को पढ़ोगें तो मूर्ख बन जाओंगे
कादम्बिनी कार्यकारी सम्पादक श्री विष्णु नागर की क़लम से इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे! े