Jan 30, 2007

सास को लेकर भागा दामाद बेटी(पत्नी) पहुची कानून के पास

कहते हैं इश्क पर कोई जोर नहीं चलता। यह कभी भी, कहीं भी और किसी से भी हो सकता है। इस बात को सच साबित कर दिखाया मध्य प्रदेश के एक दामाद और उसकी सास ने। इनके बीच ऐसा जबर्दस्त चक्कर चला कि सामाजिक मर्यादा को तिलांजलि दे दोनों घर से भाग निकले। यह दिलचस्प वाकया राज्य के सीहोर जिले में हुआ। कालीपीपल गांव के निवासी पप्पू मालवीय की शादी पास के एक गांव की लड़की से हुई। शादी के बाद पप्पू अपने ससुराल में ही रहने लगा। इस बीच पप्पू और उसकी सास की आंखें चार हुई और कुछ ही दिनों के बाद दोनों भाग गए। फिलहाल, दोनों भोपाल में रह रहे हैं। लेकिन इस सबसे के बीच पप्पू की पत्नी की जिंदगी तबाह हो गई। वह अपने पति को वापस पाने के लिए दर दर की ठोकरें खा रही है। उसने इस मामले में जिले के परिवार परामर्श केंद्र का दरवाजा भी खटखटाया है। केंद्र के पहले बुलावे को तो पप्पू और उसकी सास ने नजरंदाज कर दिया। दोनों दूसरे बुलावे पर बड़ी मुश्किल से पहुंचे, लेकिन उन्होंने एक दूसरे का साथ छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर विचार के लिए कुछ समय मांगा है। केंद्र ने मामले की सुनवाई के लिए चार फरवरी की तिथि तय की है।

Jan 24, 2007

हँसना भी जरूरी - भाग दो

यमराज जी एक आदमी को नरक में लेकर गए। आदमी ने देखा कि एक महात्मा जी अप्सरा के साथ डांस कर रहे थे।
आदमी ने यमराज जी से पुछा - इस महात्मा की सजा इतनी मजेदार क्यों है?
यमराज जी आदमी से कहा - यह महात्मा की नहीं अप्सरा की सजा है।



मिनी जोर-जोर से भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि हे भगवान मॉस्को को चीन की राजधानी बना दो।
उसके पापा ने जब यह सुना तब वह बोले- मिनी, यह क्या अनाप-शनाप प्रार्थना कर रही हो?
मिनी ने जवाब दिया- क्या बताऊं पापा,आज भूगोल के पेपर में गलती से मैंने मॉस्को को चीन की राजधानी लिख दिया है।



भिखारी ने एक आदमी से - साहब एक रुपया दे दो, कुछ खा लूंगा।
साहब, भिखारी से कहा - तुम्हें शर्म नहीं आती, सड़क पर खड़े होकर भीख मांग रहे हो।
भिखारी (खिसियाता हुआ)- तो क्या करूं साहब, भीख मांगने के लिए दफ्तर खोल लूं!



पुलिस की नौकरी के लिए सुधीर इंटरव्यू देने गया।
कप्तान (सुधीर से)- अगर बिना लाठी या गोली चलाए तुम्हे भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कहा जाए तो क्या करोगे?
सुधीर (कप्तान से)- मैं झोली फैलाकर चंदा मांगने लगूंगा।



नौकरानी (मालकिन से)- आप उदास क्यों हैं?
मालकिन (नौकरानी से)- तुम्हारे साहब अपने ऑफिस की टाइपिस्ट से प्यार करने लगे हैं।
नौकरानी- नहीं ऐसा नहीं हो सकता है यह बात आप मुझे जलाने के लिए कह रही हैं।



अध्यापक (एक छात्र के पिता से)- जी आपका बेटा कक्षा में सबसे कमजोर है।
पिता (अध्यापक से)- भगवान की दया से घर में दो-दो गाय हैं, घी दूध की भी कमी नहीं है। मालूम नहीं फिर भी यह क्यों कमजोर है।



पत्रकार नेता से)- अगर कोई आपकी पार्टी का आदमी किसी दूसरी पार्टी में चला जाए तो आप उसे क्या कहेंगे?
नेता पत्रकार से - हम उसे गद्दार कहेंगे।
पत्रकार नेता से - और अगर कोई दूसरी पार्टी का आदमी आपकी पार्टी में आ जाए तो?
नेता - हृदय परिवर्तन।



जेलर (कैदी से)- तुम किस अपराध के कारण जेल आए हो?
कैदी (जेलर से)- सरकार से कम्पटीशन हो गया था।
जेलर (कैदी से)- किस बात का?
कैदी (जेलर से)- नोट छापने का।



एक रिर्पोटर महोदय एक निशानेबाज का इंटरव्यू लेने पहुंचे। घर में घुसते ही वे चकित हो गए। दीवारों पर पेंसिल के छोटे-छोटे घेरे थे और उनके बीचोंबीच गोलियों के निशान थे।
यह देखकर गदगद भाव से रिपोर्टर ने निशानेबाज से पूछा -आप महान हैं। आपका निशाना अचूक है। बताइए यह सब कैसे संभव हुआ?
इस पर निशानेबाज ने कहा- बहुत आसानी से साहब! पहले मैं दीवार पर गोली चलाता हूं। उसके बाद निशाने के इर्दगिर्द पेंसिल से घेरा बना देता हूं।



पति-पत्नी डेंटिस्ट के पास पहुंचे। पत्नी ने कहा, डॉक्टर साहब दांत निकलवाना हैं। जरा जल्दी में हूं। इसलिए बिना किसी पेन किलर का प्रयोग किए दांत को जल्द से जल्द उखाड़ डालिए।
डॉक्टर- अरे वाह ! आप तो बहुत बहादुर महिला हैं, दिखाइए तो जरा, कौन सा दांत निकलवाना है।
पत्नी-(पास बैठे पति से)- ए जी, जरा मुंह खोलो और डॉक्टर साहब को दांत दिखाओ।



पत्नी (गुस्से में)- आज तक तुमने अपनी जिंदगी में किया ही क्या है?
पति (गर्व से)- मैंने अपना जीवन खुद बनाया है।
पत्नी- लो, और मैं हूं कि अब तक ईश्वर को दोष दे रही थी।

संकलन विभिन्न स्त्रोतो से

Jan 12, 2007

स्‍वामी विवेकानन्‍द जयन्‍ती---- 12 जनवरी, 1862




आज स्‍वामी विवेकानंद की जयंती है, स्‍वामी विवेकानंद एक ऐसे व्‍यक्तित्‍व के धनी व्‍यक्ति थे जिन्‍होने मात्र 39 वर्ष के जीवन काल मे देश के युवाओं तथा जन मानस में एक ऐसी मन्‍त्र दीक्षा दी, कि पूरा देश आज उनका अनुकरण कर रहा है। स्‍वामी विवेकानन्‍द कोई दिव्‍यात्‍मा नही थे, किन्‍तु उन्‍होने अपने गुणों के बल पर अपने आपको दिव्‍यात्‍मा की श्रेणी मे ला कर खड़ा कर दिया है।
स्‍वामी विवेकानन्‍द के बारे मे बहुत कुछ लिखना चाह रहा था किन्‍तु लिखते लिखते एक ऐसा चिठ्ठा मिल गया जिसके आगे मै कुछ न लिख सका अगर लिखता तो वह स्‍वमी विवेकानन्‍द के बारे मे बहुत कम होता। मै आपको इस लेख के लिंक दे देता हूँ। आप वहॉ जाकर ही पढ़े और लेखक को धन्‍यवाद ज्ञापित करे।
अन्‍य लिंक

Jan 11, 2007

आस्‍था की नगरी मे मौत का नर्तन

दिनाँक 10/1/2007 को इलाहाबाद के दिल कहे जाने वाले सिविल लाइन्‍स इलाके मे बहुमन्जिला इमारत ढ़ह गई। इमारत के गिरते ही आस-पास के महौल मे हड़कम्‍प मच गया। कुछ का कहना कि शायद कोई विमान आ कर गिरा है तो कोई सोच रहा था कि भूकम्‍प आया है, तो कुछ व्‍यक्ति सोच रहे थे कि अर्द्ध कुम्‍भ के दौरान आंतकवादियों ने हमला कर दिया है। जितने मुँह उतनी बाते हो रही थी। पर बात कोई और थी, सिविल लाइन्‍स क्षेत्र की करोड़ों की जमीन का मामला था पॉंच मन्जिले सिर्फ 1 माह मे बनकर तैयार कर दी गई थी। प्रत्‍येक आठ दिनों मे एक मन्जिल का लिन्‍टर डाला जा रहा था।

मामला पूरा का पूरा राजनीति व स्‍थानीय अधिकारियो की शह पर हो रहा था, इस जमीन पर निर्माण करने करने वाला बिल्‍डर जमील अहमद स्‍थानीय अधिकारियों के बीच जाना माना नाम है जिसके नाम से अधिकारी भी ख़ौफ खाते है। वह पिछले एक दशक से इस प्रकार का अवैध कार्य कर रहा है, परन्‍तु अधिकरियों के कान पर जूँ तक नही रेग रही थी और जिसका परिणाम था कि इस विल्डिंग का धरासाई होना। यह बिन्‍डर होने के साथ ही साथ सपा का नेता भी है, और अन्‍य दलो के नेतओं से भी मधुर सम्‍बन्‍ध भी है।

इस निर्माण के साथ साथ कई अन्‍य निर्माण भी वह करा रहा है, और वह करैली मुहल्‍ले मे लगभग 400 बीधे की कालोनी का भी निर्माण करा रहा था। पर अश्‍चर्य करने की बात यह है कि इलाहाबाद विकास प्रधिकरण(ADA) को इस कालोनी के निर्माण की जानकारी भी नही है।

इस हासदे की खबर पूरे महानगर मे महामारी की तरह फैल गई, स्‍थानीय लोग, संद्य के स्‍वयंसेवक, सेना तथा स्‍थानीय प्रशासन ने मौके पर फसे लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया। हर जुबा़न पर इस हादसे की चर्चा हो रही थी और बत्‍दुआ निकल रही थी कि इन दोषियों को नर्क भी न नसीब हो। स्‍थानीय प्रशासन ने मामले को भरसक दबाने का प्रयास किया कारण उत्‍तर प्रदेश के चुनाव भी हो सकते है। प्रशासन ने मात्र तीन लोगो की मरने की धोषण कि जबकि प्रत्‍यक्ष दर्शी मजदूरों का कहना था कि लगभग 150 लोग कार्य कर रहे थे लगभग 80 के दबे होने की सम्‍भावना है। जिले के सबसे बडे़ अस्‍पताल स्‍वरूपरानी मेडिकल कालेज मे न तो दवा उपल्‍ब्‍ध थी न तो पट्टी।

मजूदूरों का कहना था कि रात 8 बजे से ही बिल्डिग से चर्र चर्र की आवाज आ रही थी पर किसी ने ध्‍यान नही दिया जिसका परिणाम आज हमारे सामने है। अब प्रश्‍न उठता है कि क्‍या दस दोषियों को सजा मिल पायेगी या फिर सरकार इन्‍हे मौत के ताण्‍डव का लाइसेन्‍स देती रहेगी।

सम्‍बन्धित लेख के चित्र के लिये चूहे का खटका चापें करे अदिति पर जाईये

Jan 10, 2007

‘हिन्‍द युग्‍म’ एक प्रयास

इन्‍टरनेट पर हिन्‍दी के विकास के लिये लिये हिन्‍द युग्‍म नामक हिन्‍दी कविता ब्‍लाग की आधाराशिला रखी जा रही है। जिसमे पहले से ही अनेको वरिष्‍ठ कवियों तथा उभरते हुऐ युवा कवियों की रचनाऐ विभिन्‍न दिवसों मे प्रकाशित हो रही है।

परन्‍तु एक समस्‍या है कि एक सीमित वर्ग तक ही हिन्‍दी को रख कर हिन्‍दी के विकास के सपने देखना सम्‍भव नही है। इसलिये हम अपने प्रयासों को आगे बढ़ाते हुये इस कार्य मे आपकी सहभागिता की अपेक्षा करते है क्‍योकि किसी भी कार्य मे बिना समूह अथवा सहयोग के सफलता की सम्‍भावना नही होती है। इस कार्य मे रोचकता लाने के लिये इसमे कवि प्रतियोगिता का स्‍वरूप दिया जा रहा है। जिसमे किसी भी प्रकार के कवि भाग ले सकते है, अर्थात यह प्रतियोगिता विधाओं की अनिवार्यता से बन्‍धन मुक्‍त है। आपके द्वारा निर्धारित तिथि तक भेजी गई कविताऐं (जो निर्णाय‍क मंडल के द्वारा चुनी जाती है) हिन्‍द युम पर प्रकाशित की जायेगी और इसके परिणाम स्‍वरूप आपको हिन्‍द युग्‍म के द्वारा सम्‍मानित एवं पुरस्‍कृत किया जायेगा, इन कविताओं को प्रत्‍येक सोमवार को प्रकाशित किया जायेगा।

चुकिं हमारा प्रयास नेट पर हिन्‍दी का विस्‍तार एवं विकास करना है तो इसमे कवियों के अतिरिक्‍त पाठकों के लिये भी एक प्रतियोगिता है। बस पाठको के भी पाठक से थोडा हट कर लेखक बनना होगा आपको हिन्‍द युग्‍म पर प्रकाशित होने वाली सभी कविताओं पर टिप्‍पडि़यॉं प्रदान करनी होगी। प्रत्‍ये माह मे सर्वाधिक तथा समसे उच्‍चकोटि कि विश्‍लेषणत्‍मक टिप्‍पड़ी को भी पुरस्‍कृत किया जायेगा।

एक बात पर आपका घ्‍यान इगित करना चाहुँगा कि आपके द्वारा भेजी जानी वाली रचनाऐ एवं टिप्‍पडि़यॉं युनीकोड हिन्‍दी मे होनी चाहिये। अरे-अरे आप निराश क्‍यों हो नहे है? आपको निराश होने की कोई जरूरत नही है आप चाहे तो हमें रचनाऐ रोमन भाषा मे भी लिख सकते है। हम उसे युनीकोड मे बदल देगे। हॉं आप टिप्‍पडि़यों को रोमन मे भी लिख सकते है। किन्‍तु बिना आपके हिन्‍दी लिखे हिन्‍दी का विकास सम्‍भव नही है। आप हमारे समूह से सम्‍पर्क कर सकते है आपको हिन्‍दी टंकण (टाईपिंग) भी सिखाया जायेगा। चूकि हाल मे ही विभिन्‍न शोधों से पता चला है कि हिन्‍दी भाषा की दृष्टि से तो विकास कर रही है किन्‍तु लेखन की दृष्टि से देवनागरी हिन्‍दी का स्‍थान धीरे धीरे रोमन हिन्‍दी ले रही है। तो हमे अपनी देवनागरी लिपि की रक्षा के लिये प्रयास करने होगें तो फिर देर किस बात की कर रहे है। तो हो जाइये शुरू।

आप किसी भी प्रकार की सहायता के लिये मुझसे, शैलेश जी तथा गिरिराज जी से इन ईमेल पते पर नि:संकोच सम्‍पर्क कर सकते है।

प्रमेन्‍द्र प्रताप सिंह pramendraps(at)gmail(dot)com

शैलेश भारतवासी bharatwasi001(at)gmail(dot)com

गि‍रिराज जोशी grjoshee(at)gmail(dot)com

कुछ उपयोगी लिंक

हिन्‍द युग्‍म, नियम व शर्तें, "हिन्द-युग्म" - एक परिचय, कवि-परिचय

कविता भेजने का ई-मेल hindyugm(at)gmail(dot)com

इस कार्य को सफल बनाने मे आपके किसी भी प्रकार के अमूल्‍य सुझाव व सहयोग सस्‍नेह आमन्त्रित है।



Jan 9, 2007

कृपया पक्ष मे टिप्‍पड़ी करे अन्‍यथा न करें

नववर्ष के दिन मैने अमित जी के ब्‍लाग एक लेख देखा, जिस पर उन्‍होने कुछ बातो का उल्‍लेख किया था। मैने भी उनके इस लेख पर अपनी एक टिप्‍पणी प्रेषित की थी किन्‍तु वह माडरेशन की शिकार हो गई। कुछ अटपटा सा लगा कि मैने ऐसा क्‍या लिख दिया कि वह पठनीय नही था। मैने उस टिप्‍पणी की कोई प्रति अपने पास सुरक्षित नही रखी थी, पर मुझे जहॉं तक याद है मै अक्षरस: बताने का प्रयास करूँगा।

मैने जो कुछ भी टिप्‍पणी मे लिखा वह निम्‍न है -----

अमित जी आपके पोस्‍ट को पूरा ध्‍यान पूर्वक पढ़ा लगा कि दिव्याभ जी ने जिन शब्‍दो का प्रयोग किया वह कद्यपि उचित नही था और मै इन शब्‍दों के प्रयोग की कढ़ी शब्‍दो मे निन्‍दा करता हूँ। पर ध्‍यान देने योग्‍य यह भी है कि जैसा आपने कहा कि मै चिठ्ठाकार को ईमेल भेज रहे थे वह उनके पास गया तो गलती तो अपकी थी अगर आपने इसकी माँफी मॉंग ली होती कि भूल से चला गया है तो बात वही खत्‍म हो जाती। और एक बात जब बात द्विपक्षीय हो रही हो तो उसे बहुपक्षीय बनने से स्थिती और खराब होती है। आपने जिस प्रकार दिव्याभ जी के ईमेल को सर्वजनिक किया वह ठीक नही था। कोशिस करनी चाहिये कि इस प्रकार के झंझटो से बचा जाय। मै एक बार फिर से किसी चिठ्ठाकार या किसी के प्रति इन प्रकार के शब्‍दो की निन्‍दा करना हूँ।

मेरी पूरी टिप्‍पणी मेरे विवेकानुसार जो मैने लिख था वह यही है, और इसमे क्‍या माडरेशन वाली बात थी जिसे माडरेशन का कोप भाजन का होना पड़ा और इसे प्रकाशित नही किया गया मुझे नही समझ मे आया, अगर अपने मन की ही टिप्पणी की इच्‍छा हो तो इस पर लिख दिया जाये कि केवल पक्ष मे बोलने वाले ही टिप्‍पड़ी करे विपक्ष मे लिखने वालों की टिप्‍पडियों को प्रकाशित नही किया जायेगा। तो मैं टिप्‍पणी करता न ही इस पोस्‍ट को लिखता। अब तो मै सोचने पर मजबूर हूँ कि माडरेशन वाली ब्‍लागों पर टिप्‍पणी करुँ भी कि नही। क्‍योकि आधे घन्‍टे-पन्‍द्रह मिनट बैठ कर टाइप करों और किसी को पंसद न आया तो टिप्‍पणी को कोप का भाजन बनना पड़े, आप सभी से माडरेशन वालो से निवेदन है कि आप आपने ब्‍लाग पर नोटिस चस्‍पा कर दे कि आपको किस प्रकार की टिप्‍पणी की जाये ताकि भूल वश कोई आपके मन के विपरीत टिप्‍पणी न करे। और टिप्‍पड़ीकार की करनी का परिणाम उसकी टिप्‍पड़ी को न भुतना पडे।

Jan 6, 2007

भारत मे राफाएल नाडल

क्रिकेट के कई दिग्‍गज खिलाड़ियों की छुट्टी होने वाली है टेनिस दूसरे नम्‍बर के प्राख्‍यात खिलाड़ी राफयल नाडाल ने आज टेनिस के अतिरिक्‍त क्रिकेट मे भी हाथ अजमाने लगे है। कल हुये एक प्रर्दशनी मैच मे अपने नये क्रिकेटिया कोच भारत के पूर्व क्रिकेट कप्‍तान कृष्णामचारी श्रीकांत रहे। उन्‍होने अपने नये शिष्‍य को ऐसी शिक्षा दी की पहले मैच मे छक्‍का मार कर अपने नये खेल का आगाज किया।
उनके टेनिस खेल का कोई सानी नही है। तथा इस खेल मे लिये वे किसी परिचय के मोहताज नही है। आज कल वे भारत के एक मात्र एटीपी टेनिस टूर्नामेन्‍ट चेन्‍नई ओपन मे प्रथम वरीयता प्राप्‍त खिलाड़ी के रूप मे खेल रहे है। आज उनका मुकाबला भारत के करन रस्‍तोगी से हुआ किन्‍तु रस्‍तोगी को हार का समाना करना पड़ा।

नाडाल की काबिलियत किसी से छिपी नही है। उनकी काविलियत की कहानी स्‍वयं पिछले वर्षो के आकड़े कहते है जिसमे उन्‍हेने विश्‍व के नम्‍वर एक खिलाड़ी रोजर फेडरर के खिलाफ खेले अब तक कैरियर मे नाडाल और फेडरर के बीच

9 मुकाबले हुऐ है जिसमे से नाडाल ने 6 मुकाबले जीते है।



प्रोफाइल
नाम राफएल नाडाल
जन्‍म 3/6/1986
जन्‍म स्‍थान मानकोर
ऊचाई 6'1''
वजन ८५ किलो
कोच टोनी नाडाल
जूते Nike
रैकेट Babolat
कपडे़ Nike
कैरियर प्राइज मनी $8,336,939
पंसददीदा कोर्ट Clay

Jan 1, 2007

स्‍वाकलन - 2006,

पुराना वर्ष कैसे बीत चला पता ही नही चला, पुराने वर्ष मे जिनदगी की वास्‍तविक हकीकत से रूबरू होने का मौका मिला। काफी कुछ सीखने का मित्र जैसे ब्‍लाग बनाना, गुस्‍से मे कमी करना, संयम बनाये रखना और विवदों मे पढना किन्‍तु संयम व्‍यव्‍हार के साथ। आज काफी कुद वास्‍तविकता को जाना क्‍या है वास्‍तविकता? जब आप अपने घर मे सबसे छोटे होते है तो निश्चित ही आपके व्‍यवहार मे बचकाना पन होना स्‍वाभाविक होता है, जैसा कि मै अदिति के जन्‍म के पहले मै 19 साल तक सबसे छोटे का अनुभव रहा है।
बीते साल मे की 31 तारीख को मैने कुछ और भी सीखा, हमेशा अडे़ रहने मे बडाई नही है। लोच का होना भी जरूरी होता है। संसार की कोई भी ऐसी वस्‍तु नही है जो कठोर के साथ मजबुत भी हो और बिना लचीलेपन के कोई भी वस्‍तु की मजबूती क्षणिक होती है। यह मेरे लिये साल की कुछ उपलब्‍धियों मे एक है, सन 2006 ने मुझे स्‍नातक होने का रूतबा दिला दिया, अब मै भी गर्व से कह सकता हूँ कि मै ग्रेजुएट हूँ।
अपने विवेक के तराजू मे मै अपने आप को तौलता हूँ तो वर्ष 2006 मे मैने कुछ पाने के साथ कुछ खोया भी है, पहला कि मेरी बहुत इच्‍छा थी कि मै 2006 से ही विधि स्‍नातक मे प्रवेश लूँ किन्‍तु यह दिवा स्‍वपन की भातिं ही रह गया। इस बीते वर्ष ने एक और सीख दी कि अतिअत्‍मविश्‍वसी होना ठीक नही है। मुझे अपने आप पर पूरा भरोसा कि मै विधि प्रवेश परीक्षा पास कर लूँगा, इलाहाबाद मे विश्‍वविद्यालय के आतिरिक्‍त दो महाविद्यालय है जिसमे मैने केवल विवि और एक महाविद्यालय मे ही परीक्षा दी थी, और पूरा विश्‍वास था कि मै क्‍वालीफाई कर जाऊगा किनतु अपना सोचा कुछ होत नही हरि सोचा सब होय और ए‍डीसी महाविद्यालय की प्रवेश परीक्षा मे केवल 4 अंको से चूक गया, अगर मैने सीएमपी मे भी पर्चा भर दिया होता तो ठीक होता किन्‍तु प्रवेश हो ही जायेगा, असत्‍य साबित हुआ। आरक्षण की मार भी लगी, एससी/एसटी के छात्रों का प्रवेश 105 अंक पर ही होगया। मेरा सोचना भी गलत न था क्‍योकि जब 2003 मे स्‍नातक प्रवेश परीक्षा मे मेरा 15000 छात्रों मे 111वॉं स्‍थान था। कुछ मित्रों ने कहा कि एलएलबी की करनी है तो कही से भी कर लो पर मन नही मान रहा था कि जब संगम के तट पर (इलाहाबाद विश्‍वविघालय) हूँ तो स्‍नान के लिये कुनदी के तट पर जाऊँ। सो अब 2007 मे लक्ष्‍य है कि अपने लक्ष्‍य की प्राप्ति करूँ, जहॉं कमी रख गई है वह पूरी करूँ।
साल 2006 मे कुछ स्‍वाभाव वश गलतियॉं हुई पर साल के अन्तिम दिन तक मैने सुधार करने की कोशिस की और सफल रहा। एक विवाद जो लम्‍बे समस तक चला और चलता र‍हता किन्‍तु उसका भी अन्‍त करके सुखद अहसास हो रहा है।
मैने व्‍यक्तिगत कारणो से दो बार न लिख पाने मे असमर्थता जाहिर किन्‍तु आज तक लिख रहा हूँ। एक चुनाव का मसौम भी आया, मै जान रहा था कि मेरी कोई सम्‍भावना नही है, कईयों श्रेष्‍ठों के बीच मुझे अन्तिमवॉं स्‍थान दिया जाना तो वह भी मेरे लिये बहुत अधिक होता। संजय भइया ने चुनाव रिजल्‍ट की घोषणा कि मुझे मालूम था कि मेरा नाम न होगा। किनतु एक बार मन मे विस्‍वास तो था कि शायद कि मेरा नाम हो सकता है पर नही था, थोडा अटपटा सा लगा,मन मे कई विचार आये कि मेरे सभी चिठ्ठो पर विचार नही किया गया होगा क्‍योकि कविता अलग लिखता हूँ फोटो ब्‍लाग अलग है और अब तो कविता भी शैलेश जी के कवि मित्र पर जा रही है, पर यह सब केवल मन को तसल्‍ली देने तक ही ठीक था क्‍योकि मै क्‍या था वह मै जानता था, पर जब बन्‍धु गिरिराज न थे तो मै क्‍या हस्‍ती था जो आता। गिरिराज के नाम न होने से कुछ दुख तो जरूर हुआ क्‍योकि उन्‍होने कम समय जो भी लिखा वह कि ग्रन्‍थ से कम न था।
एक बार मन मे था कि चुनाव मे भाग ही न लिया जाय पर अपने आप को परखने के लिये यह जरूरी था पर यह कोई प्रतियोगिता थोड़े ही थी कि हम हार गये, हम सभी हार के भी जीत का का स्‍वाद ले रहे है। कोई भी जितेगा अपना ही जीतेगा और अपने वोट से जीतेगा। तो इसमे किस प्रकार का शोक करना। मुझे किसी से कोई शिकायत कभी नही रही है। हमेशा प्‍यार ही मिला प्‍यास के अलावाँ कुछ और न मिला, नही और कुछ भी मिला कोई मित्र मिला, तो काई भाई तो कोई अभिववावक तुल्‍य श्रेष्‍ठ जन तो कोई बहन। जब इतने लोग साथ हो तो कोई हार भी सकता है? आपके दिल मे सदा जगह बनी रहे यही मेरी वास्‍तविक जीत होगी।
आप सभी का स्‍नेह मुझे लगातार मिलता रहे यही अभिलाषा है। अपना नववर्ष तो विक्रमी संवत होता है किन्‍तु लोग यही मना रहे है, कोई गलत नही है पर अपने नव वर्ष को भी भूलना नही चाहिये। आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऐ