Mar 28, 2007

श्रद्धांजली - डा. सत्‍य प्रकाश मिश्र

क्‍या हो रहा है इलाहाबाद के साथ ? किसकी नज़र लग गई है इलाहाबाद के साहित्‍यकारों के ? पहले कैलास गौतम, फिर कमलेश्‍वर फिर अतीक इलाहाबादी और अब प्राख्‍यात हिंदी साहित्‍यकार और समालोचक डा. सत्‍य प्रकाश मिश्र को इलाहाबाद ने असमयिक खो दिया है।
डा. मिश्र का निधन इलाहाबाद के ही स्‍थानीय अस्‍पताल में हुआ। कुछ दिनों पूर्व ही उन्‍हे गले मे इन्‍फेकशन के कारण भर्ती करया गया था। डा. मिश्र इलाहाबाद के साहित्‍यकारों में बड़ा नाम थे, उत्‍तर प्रदेश सरकार ने उन्‍हे उनके हिन्‍दी साहित्‍य के योगदान को देखते हुए साहित्‍य भूषण सम्‍मान से नवाजा था। उल्‍लेखनीय है कि डा. मिश्र हिन्‍दी साहित्‍य के तीन शीर्ष सम्‍मानों भारतीय ज्ञानपीठ, सरस्‍वती, और व्‍यास सम्‍मान के निर्णायक मंडल के सदस्‍य भी थे।
डाक्‍टर सत्‍य प्रकाश मिश्र ऐसे व्‍यक्तित्‍व के धनी व्‍यक्ति थे जिन्‍हे भूलाया जाना कठिन होगा। डाक्‍टर मिश्र केन्‍द्रीय इलाहाबाद विश्‍ववि‍द्यालय के हिन्‍दी विभाग के विभागाध्‍यक्ष थे और उन्‍हे इसी वर्ष अवकाश प्राप्‍त करना था। जहाँ तक कि मैने इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय से स्‍नातक स्‍तर की शिक्षा ग्रहण की है और मेरा विषय भी हिन्‍दी था। मैने उन्‍हे वयक्तिगत तौर पर बहुत ज्‍यादा नही जानता था किन्‍तु मै उनके बारे में जिनता जनता हूँ कि वे एक अच्‍छे मृदु स्‍वाभाव के व्‍यक्ति थे। चूकिं वे कभी स्‍नातक स्‍तान की क्‍लास नही लिया करते थे, पर मैने अपने वरिष्‍ठ साथियों से उनके बारे मे सुना एवं जाना था तो वे एक अच्‍छे छात्र मित्र गुरू भी थे। विश्‍वविद्यलय मे मेरा एक बार उनसे सामना हुआ था जब मुझे अपने फार्म पर विभागाघ्‍यक्ष के हस्‍ताक्षर चाहिऐ था।
डाक्‍टर मिश्र जिनते बड़े व्‍यक्ति थे उससे भी बड़ा था उनका अनुशासन और कर्त्तव्‍य निष्‍ठा। वे एक गुरू के रूप मे सफल अध्‍यापन करते थे तो एक साहित्‍यकार के रूप मे सफल अलोचना। उन्‍होने अपनी सहित्‍यक प्रसिद्धि को अपने अध्‍यापन के बीच नही आने दिया। डाक्‍टर साहब की यही कत्‍र्त्‍व्‍य निष्‍ठा हमारे बीच खलेगी।
हिन्‍दी साहित्‍य के समालोचक डा. सत्‍य प्रकाश को उनके शिष्‍य की तरफ से श्रद्धांजली, आज जो मेरी लेखनी चल रही है उसमें उनका महान योग दान है। गुरू के बिना शिष्‍य केवल शून्‍य है बड़ा शून्‍य।

Mar 27, 2007

कहानी -असफल स्‍याही लेखन की

मैने भी एक असफल स्‍याह चिठ्ठा लिखने प्रयास किया था आज से लगभग दो माह पहले दिनॉंक 17/01/2007 को अपनी कुछ मजबूरियों को लेकर। इसके प्रति प्रेरित होने तथा असफल होने के पीछे कई कारण थे। कारण कि मै इस ओर प्रेरित हुआ ? उन दिनों मै भिन्‍न कारणों से हिन्‍दी टंकण नही कर पा रहा था। तब उन्‍ही दिनों सागर भाई ने मुझे बाराहा के लिये कई घन्‍टों की आँनलाइन कोचिंग मुझे दी थी पर मुझे बाराहा पर लिखने मे बिल्‍कुल भी मजा नही आता था और न ही आज भी आता है। मुझे एक पत्र लिखना हुआ, IndicIME के बिना मै बिल्‍कुल विकलंग सा लगने लगता हूँ। फिर मैने एक जुगाड़ लगाया कि कलम और कागज का उपयोग किया जाय। और मैने किया भी, पर मेरे पास समस्‍याओं की कमी नही थी और मेरा स्‍कैनर भी ठीक नही था। तो एक और जुगाड़ असफल जुगाड़ लगाया और पत्र का फोटों अपने कैमरे से खीच लिखा। पर उसका रूप देखने के बाद मुझे लगा कि उक्‍त दस्‍तावेज को यहीं दफना देना उचित होगा।
पर जब बात चल ही चुकी है तो मै भी पीछे क्‍यों रहूँ असफलता भूनाने से। तो देखिऐ वह पत्र जो मैने 17 जनवरी को लिख था।

Mar 20, 2007

भगवान झूलेलाल जंयती(चैत्र शुक्‍ल द्वि‍तीया) पर विशेष


चैत्र शुक्‍ल द्वि‍तीया संवत् 1117 करे सिंध प्रान्‍त मे जनमे जो अब पाकिस्‍तान मे है, के गॉंव मे एक बालक ने जन्‍म लिया। मकबर खाँ ने यह समाचार पाते ही अपने एक सैनिक को उस बालक को लाने के लिये भेजा। देखते ही देखते चम्‍तकार हुआ, और वह बालक किशोर तरूण, प्रौढ़ बनकर फिर से शिशु बनकर पालने मे झूलने लगा। वहॉं बालक को लेने गये सैनिक ने यह देख कर दंग रह गया और उसने बालक के पिता रतन राय से बालक को शाह के पास ले जाने को कहा। सैनिक जैसे ही गॉंव के बाहर निकल कर कुछ दूर पहुचे तो देखा कि वह बालक सिन्‍धु सागर से निकल कर संगठित सेना के साथ उसी की ओर आ रहा है। भय के मारे सैनिक रात भर सो न सका और जब प्रात: काल शाही महल पहुचा तो उसे ज्ञात हुआ कि वह बालक कल रात में शाहि महल मे आया था और तरह-तरह के चमत्‍कारिक रूप दिखाया। इस घटना से मकबर खाँ इतना भयभीत हो गया कि प्रतीज्ञा की कि अब वह हिनदुओं पर अत्‍याचार का रास्‍ता छोड़ कर सबकों भाई की तरह मानेगा। उस बालक का नाम उदयराज रखा गया तथा उस बालक ने नये पंथ की स्थापना की जिसका नाम दरियालाल था। बड़ी संख्‍या में लोग उनके अनुयाई बने। उनका उपदेश था कि सगुण हो या निर्गुण सभी एक ही ईश्‍वर के रूप है, सभी देव ज्‍योर्तिमय और जलमय है। सभी को उपदेश देकर वे वीरोचित वेशभूषा मे वे अश्‍व पर चढ़कर चिर प्रयाण के लिये अज्ञात स्‍थान की ओ चल दिये मार्ग मे एक स्‍थान पर त्रिशूल गाड़ा उससे पाताल का मार्ग बन गया। उसी मार्ग से उदयराज पाताल लोक चले गये। उसी दिने उदयराज भगवान झूलेलाल बन गये। सिन्‍धी समाज के लो उन्‍हे अवतारी पुरूष मान कर उनकी पूजा अर्चना करते है।

Mar 19, 2007

वर्ष प्रतिपदा - भारतीयता का उत्‍सव

भारतीय संस्‍कृति के अनुसार वर्ष का प्रारम्‍भ चैत्र शुक्‍ल से होता है। यह सृष्टि के आरम्‍भ का दिन भी है। यह वैज्ञानिक तथा शास्‍त्रशुद्ध गणना है। इसकी काल गणना बड़ी प्रचीन है। सृष्टि के प्रारम्‍भ से अब तक 1 अरब, 95 करोड़, 58 लाख, 85 हजार, 106 वर्ष बीत चुके है। यह गणना ज्‍योतिष विज्ञान के द्वारा निर्मित है। आधुनिक वैज्ञानिक भी सृष्टि की उत्‍पत्ति का समय एक अरब वर्ष से अधिक बता रहे है। अपने देश में कई प्रकार की कालगणनाकी जाती है- युगाब्‍द(कलियुग का प्रारम्‍भ), श्री कृष्‍ण संवत्, शक संवत् आदि है।
चन्‍द्रमा की गति के साथ अपनी कालगणना क्‍यों जुड़ी? भोला भाला ग्रामीण भी चन्‍द्रमा की गति से परिचित है। वह जानता है कि आज पूर्णिमा है या द्वि‍तीया। इस प्रकार काल गणना हिन्‍दू जीवन के रोम-रोम एवं भारत के कण-कण से अत्‍यन्‍त गहराई से जुड़ी है। ठिठुरती ठंड मे पड़ने वाला ईसाई नववर्ष पहली जनवरी से भारतवंशियों का कोई सम्‍बन्‍ध नही है।
प्रतिपदा हमारे लिये क्‍यों महत्‍वपूर्ण है, इसके सामाजिक एवं ऐतिहासिक सन्‍दर्भ निम्‍न है-
1 मर्यादा पुरूषोत्‍तम श्रीराम का राज्‍याभिषेक।
2 मॉं दुर्गा की उपासना की नवरात्र व्रत का प्रारम्‍भ
3 युगाब्‍द(युधिष्‍ठिर संवत्) का आरम्‍भ
4 उज्‍जयिनी सम्राट- विक्रामादित्‍य द्वारा विक्रमी संवत् प्रारम्‍भ।
5 शालिवाहन शक् संवत् ( भारत सरकार का राष्‍ट्रीय पंचाग)
6 महर्षि दयानंद द्वारा आर्य समाज की स्‍थापना
7 संघ के संस्‍थापक केशव बलिराम हेडगेवार का जन्‍म दिन।
आप सभी को भारतीय नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऐं।

Mar 18, 2007

टीम इण्डिया की हार और अदिति का विरोध्‍

टीवी पर टीम इण्डिया का विरोध हो रहा था और लोग कर रहे थे हाय हाय तो अदिति भी शामिल होगई हाय हाय में


स्‍वामी विवेकानन्‍द की एक आकंक्षा

"तुम्‍हारे भविष्‍य को निश्चित करने का यही समय है। इस लिये मै कहता हूँ, कि तभी इस भरी जवानी मे, नये जोश के जमाने मे ही काम करों। काम करने का यही समय है इसलिये अभी अपने भाग्‍य का निर्णय कर लो और काम में जुट जाओं क्‍योकिं जो फूल बिल्‍कुल ताजा है, जो हाथों से मसला भी नही गया और जिसे सूँघा ही नहीं गया, वही भगवान के चरणों मे चढ़ाया जाता है, उसे ही भगवान ग्रहण करते हैं। इसलिये आओं ! एक महान ध्‍येय कों अपनाएँ और उसके लिये अपना जीवन समर्पित कर दें "

------ स्‍वामी विवेकानंद

Mar 13, 2007

प्रतीक जी का साक्षात्‍कार : न तुम काबिल न हम काबिल

हिन्‍दी ब्‍लाग के सबसे युवा चिठ्ठाकार श्री प्रतीक पान्‍डेय जी का कल जन्‍म दिन था। युवा के साथ साथ प्रतीक जी का लेखन काफी उम्‍दा है, जिससे हिन्‍दी ब्‍लाग के पाठक काफी प्रभावित रहते है। हिन्‍दी ब्‍लाग के साथ साथ प्रतीक जी आग्रेजी ब्‍लाग मे भी हाथ अजमाते रहते है, और वहॉं पर भी इन‍के नियमित पाठक है। सर्वप्रथम तो मै उन्‍हे जन्‍म दिन कि बधाई दूँगा कि यह दिन उनके जीवन मे हमेशा प्रसन्‍नता ले कर आये। वैसे मेरा उनका साक्षात्‍कार लेने का कोई मन नही था किन्‍तु अचानक किस प्रकार यह मन बन गया कि मैने उनका साक्षात्‍कार ले ही लिया।

हमेशा की तरह आज मैने उनके गपशप कमरे की हरी बत्‍ती जलती देख कर मिलने जा पहुचा, प्रतीक जी उपस्थित भी थे। मेरे उनके बीच जो बात हुई वह निम्‍न है--

स्‍वयं प्रतीक भाई जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाऐ, जल्दी से मिठाई खिलाऐं। :)

प्रतीक जी (मुस्‍कराते हुऐ) धन्यवाद, आपके लिए मिठाई रखी है, आगरा कब आ रहे हैं :-)

स्‍वयं- (मजाक के मूड मे) आगरा, क्या आपने ने पागल समझ रखा है :) आयेगें जरूर आयेगें, पर समय लगेगा किन्‍तु पगलाने के बाद :)

प्रतीक जी: (मजाक के मूड मे) नहीं... पागल तो नहीं समझा है। लेकिन अगर आप मिठाई खाने के लिए आगरा न आएँ, तो उससे भी गए-बीते हैं। :-) हम तो मिठाई खाने कहीं भी चले जाते हैं :-)

स्‍वयं: (शिकायती लहजें में) कामधेनू और सुलाकी की मिठाई मेरे पास रखी है कब खाने आ रहे है? अभी तक तो आप प्रयाग आये नही ?

प्रतीक जी विनम्रता के सा‍थ) अरे, मैं तो भूल ही गया था। परीक्षाएँ ख़त्म हो जाएँ, फिर आता हूँ। :-)

स्‍वयं स्वागत है, आपका इन्तजार रहेगा। आपने आज क्या क्या किया? क्योकि आज का दिन आपका है। प्रतीक जी कुछ ख़ास नहीं किया... वही सब कुछ किया जो रोज़ करता हूँ।

स्‍वयं (शरारत की मुद्रा मे) कुछ खास जो खास लोगो को बताते हो :)

प्रतीक जी (मुस्‍कराते हुऐ) नहीं, कुछ भी ख़ास नहीं :-)

स्‍वयं (शंकित मन से) क्या आप मुझे आपने जन्म दिन का छोटा सा साक्षात्कार देगें? मेरे ब्लाग के लिये

प्रतीक जी (गम्‍भीरता के साथ) हाँ, बिल्कुल।(हंसते हुऐ) लेकिन मुझे नहीं लगता कि मैं किसी साक्षात्कार देने के क़ाबिल हूँ।

स्‍वयं (साथ साथ हँसते हुऐ) तो मै ही कहॉं लेने लायक हूँ, कहावत है न जब मिल बैठेगें दो अन्धे यार

प्रतीक जी तो फिर ठीक है :-)

तो आईये शुरू करते है आपका और मेरा पहला साक्षात्‍कार (दोनो के द्वारा जोरदार ठाहके के साथ शुरू होता है साक्षात्‍कार)

प्रश्‍न कर्ता पहला प्रश्न

आपका हिन्दी चिठ्ठाकारी मे प्रवेश कैसे हुआ?

प्रतीक जी पहले मैं अंग्रेज़ी में एक ब्लॉग लिखा करता था। तभी इच्छा हुई कि हिन्दी में भी एक ब्लॉग बनाया जाए। हिन्दी में ब्लॉग बनाने के बाद पता चला कि क़रीब दस लोग पहले से हिन्दी में ब्लॉग लिख रहे हैं। तभी से हिन्दी ब्लॉग लेखन शुरू हो गया।

प्रश्‍न कर्ता दूसरा प्रश्न

जैसा कि आप हिन्दी के प्रराम्भिक चिठठाकरों मे से है, और जमाने मे हिन्दी लिखने और पड़ने बाले भी कम थे। जब आपको पहली टिप्पणी मिली तो कैसा लगा ?

प्रतीक जी जब मुझे पता चला कि हिन्दी में अन्य ब्लाग भी हैं, तो कुछ ब्लॉग्स पर मैंने टिप्पणी की। उस वक़्त सभी नए चिट्ठाकारों के स्वागत् के लिए उत्सुक रहते थे। तो सभी ने उत्साहवर्धन के लिए टिप्पणी की।

प्रश्‍न कर्ता तीसरा प्रश्न

आपको कैसे ब्लाग लिखने की सूझी ? (प्रतीक जी कुछ सोच रहे थे, फिर प्रश्‍नकर्ता ने कहा) शायद यह पहले प्रश्न का समरूप है या आप उत्तर देना चाहेगें?

प्रतीक जी हाँ, तभी मैं सोचने में लगा था कि क्या उत्तर हो सकता है। इसका भी उत्तर तो वही पहले वाले की तरह है।

प्रश्‍न कर्ता चौथा प्रश्‍न

आपकी अब तक कि सबसे अच्छी पोस्ट कौने सी थी ?

प्रतीक जी पोस्ट का नाम है - जिम में मेरे अनुभव यह पोस्ट मुझे सबसे अच्छी लगती है, क्योंकि इसमें लिखा एक-एक शब्द सच है।

बहुत खूब (प्रश्‍नकर्ता ने प्रसन्‍नता व्‍यक्त करते हुऐ कहा)

प्रश्‍न कर्ता पाचवाँ प्रश्न

जब आपको लगता है कि यह मेरी सबसे अच्छी पोस्ट है और कोई टिप्पणी करने नही आता या जैसी टिप्पणी आप चाहते है, (सकारात्मक या नकारात्मक में) नही मिलती है तो कैसा लगता है ?

प्रतीक जी तो काफ़ी ख़राब लगता है और लगता है कि लोगों में कुछ समझ नहीं अच्छी और ख़राब पोस्ट की :-)

प्रश्‍न कर्ता आपके जीवन मे कोई ऐसा क्षण जो आपको याद हो।

प्रतीक जी वैसे तो मुझे अपना पूरा जीवन ही याद है, लेकिन मुझे सबसे ज़्यादा ख़ुशी तब हुई थी जब मैंने पहली बार स्वामी विवेकानन्द का सम्पूर्ण साहित्य ऑनलाइन ख़रीदा था :-)

है न अजीब :-) (मेरी रजामंदी/हूकारी लेते हुऐ)

(प्रश्‍नकर्ता ने रजामंदी देते हुऐ कहा) जी हॉं यह तो बहुत ही रोमंचक होता ही है, जब कोई नया काम आप करते है।

प्रश्‍न कर्ता छठा प्रश्न

अक्सर सभी ब्लागरों की समस्या होती है समय संयोजन और परिवार के द्वारा ब्लागिंग मे सहयोग की। यह आपके साथ कैसे होता है? अर्थात कि आप समय संयोजन कैसे करते है, और आपके परिवार का आपके ब्लागिग के प्रति क्या दृष्टिकोण रहता है?

प्रतीक जी नहीं, मेरे साथ कभी ऐसा नहीं होता है। क्योंकि मैं ब्लॉगिंग के मामले में बहुत आलसी जीव हूँ और केवल तभी ब्लॉगिंग करता हूँ जब मेरे पास पर्याप्त खाली समय होता है।

प्रश्‍नकर्ता और आपके परिवार का दृष्टिकोण :) (प्रश्‍नकर्ता द्वारा परिवार की ओर इंगित करने पर)

प्रतीक जी परिवार वालों को भी कोई समस्या नहीं है।

प्रश्‍नकर्ता यह तो आपके लिये अच्छा है और हमारे लिये भी (दोनों एक साथ हँसते है)

प्रश्‍न कर्ता छठां प्रश्न

आपको किस प्रकार के लेख पढ़ने मे अच्छा लगता है?

प्रतीक जी मैं हर तरह के लेख पढ़ता हूँ। पढ़ना मेरा शौक़ है। लेकिन कम्प्यूटर के स्क्रीन पर मुझे ज़्यादा पढ़ने की इच्छा नहीं होती है। छपे हुए शब्द ही अधिक सुहाते हैं। इसलिए छोटी ब्लॉग पोस्ट पसंद आती हैं। हालाँकि हिन्दी ब्लॉग जगत् की लंबी पोस्ट्स भी जैसे-तैसे पढ़ लेता हूँ। :-)

प्रश्‍नकर्ता द्वारा बीच मे टोकते हुऐ यानी कि लोगों छोटी पोस्ट लिखनी पडेगी :)

प्रश्‍न कर्ता सातँवा प्रश्न

क्या आप अपने लेखन मे भी यही मानक रखते है?

प्रतीक जी नहीं, मेरे ब्लॉग पर पोस्ट का आकार विषय के हिसाब से होता है। कभी-कभी पोस्ट लंबी भी हो जाती हैं, लेकिन छोटी पोस्ट लिखने की ही कोशिश करता हूँ।

प्रश्‍न कर्ता आठवॉं प्रश्न

इस समय हिन्दी ब्लाग विवादों का अखाड़ा बन रहा है, ब्लगर कई ध्रुवो मे बंट रहे है। आप इस विषय में क्या सोचते है?

प्रतीक जी फिलहाल ज़्यादा कुछ नहीं कह सकता हूँ, क्योंकि मैं काफ़ी वक़्त से चिट्ठाकारी से दूर हूँ और यहाँ क्या चल रहा है इसकी जानकारी मुझे नहीं है। लेकिन मेरा मानना है कि ब्लॉग जगत् में सबको पहले की तरह एक परिवार बनकर काम करना चाहिए और गुटबाज़ी से दूर रहना चाहिए। हिन्दी चिट्ठाकारी के भविष्य के लिए यही अच्छा है।

साक्षात्‍कार के बीच और कुछ बाते और व्‍यवधान

प्रश्‍न कर्ता क्या आप है? (इन्‍टरनेट लाईन मे व्‍यधान होने के कारण सम्‍पर्क टूट गया था)

प्रतीक जी not at my desk

प्रश्‍न कर्ता क्‍या आप है ?

प्रतीक जी काफी देर बाद हाँ, प्रमेंद्र भाई, कहिए

प्रश्‍न कर्ता कहॉं चले गये थे आप? (चुटकी लेते हुऐ)

प्रतीक जी पास के बाज़ार तक गया था (हँसते हुऐ)

प्रश्‍न कर्ता अच्छा साक्षातकार मे ही बाजार हो आये

प्रतीक जी हाँ :-)

प्रश्‍न कर्ता कुछ लम्बी तो नही खीच रहा है, प्रश्न कठिन तो नही है?

प्रतीक जी हाँ, बहुत कठिन हैं। इतने कठिन तो परीक्षाओं में भी नहीं आते हैं :-)

प्रश्‍न कर्ता :-) (प्रश्‍नकर्ता ने भी हल्‍की मुस्‍कान दिया)

प्रश्‍न कर्ता नौवां प्रश्न

आपको खाने मे क्या पंसद है?

प्रतीक जी मैं खाने का बहुत शौक़ीन हूँ। हर तरह का खाना पसंद है। ख़ास तौर पर पनीर के पकवान और खीर बहुत पसंद हैं।

प्रश्‍न कर्ता अरे वाह सुन कर मुँह मे पानी आ गया (मजाक के लहजे में,)

प्रतीक जी मेरे मुंह में तो बताकर ही पानी आ गया :-) मजाक पर नहले पर दहला देते हुऐ) (दोनो मिलकर हँसते है।)

प्रश्‍न कर्ता 10वॉं प्रश्न

आपकी प्रिय अभिनेत्री कौन है? | कृपया नई मे ही बताईयेगा :)

प्रतीक जी नई अभिनेत्रियों में प्रीति जिंटा और ऐश्वर्या राय, अगर ऐश्वर्या राय को अभिनेत्री कहा जा सके तो, वैसे मेरे ख़्याल से वे मॉडल ज़्यादा और अभिनेत्री कम हैं :-)

फिर से कुछ अन्‍य बाते होने लगी

प्रश्‍नकर्ता आप 21 साल के पूरे हो रहे है? तो पूरे 21 प्रश्न पूछूँगा कोई दिक्कत तो नही है?

प्रतीक जी हाँ, अभी तो कहीं जाना है। दरअसल भैया को छोड़ने रेलवे स्टेशन जाना है। अगर आप 7 बजे बाद ऑनलाइन आ सकें, तब तो कोई दिक़्क़त ही नहीं है। नहीं तो आप मुझे प्रश्न ई-मेल कर दीजिए, मैं 7 बजे उत्तर दे दूंगा।

प्रश्‍नकर्ता ईमेल ठीक रहेगा :)

प्रतीक जी ठीक है। आप ई-मेल कर दीजिए। मैं चलता हूँ फिर मिलेंगे नमस्कार

प्रश्‍नकर्ता : नमस्कार

ईमेल से किये गये प्रश्‍न

प्रश्‍न कर्ता आपने कभी कोई कविता लिखी है? यदि हॉं तो पोस्ट किया है?

प्रतीक जी कविता तो नहीं कह सकते, लेकिन एक-दो बार कुछ तुकबंदियाँ की थीं। उन्हें पढ़ने के बाद ऐसा लगा कि अगर मैं आगे कविता न लिखूँ तो ही पाठकों की प्राणरक्षा हो सकेगी। :-) सो आगे कभी कविता लिखने का विचार मन में पैदा नहीं हुआ।

प्रश्‍न कर्ता आपकी मनपंसद पुस्तक कौन सी?

प्रतीक जी मैं अपने जीवन में सबसे ज़्यादा स्वामी विवेकानन्द के विचारों से प्रभावित हूँ। स्वामी विवेकानन्द का सम्पूर्ण साहित्य मुझे बहुत पसंद है।

प्रश्‍न कर्ता स्कूल के दिनों मे कोई शरारत या यादगार घटना?

प्रतीक जी स्कूल के दिनों में मैंने बहुत-सी शरारतें की हैं। हाँ, सबसे यादगार घटना यह रही है कि एक बार स्कूल के वार्षिकोत्सव में मुझे ढेर सारे इनाम मिले थे, इतने सारे कि उन्हें एक झोले में भरकर घर ले जाना पड़ा था।

प्रश्‍न कर्ता आपका मनपंसद खिलाडी कौन?

प्रतीक जी दूसरे करोड़ों भारतीयों की ही तरह मुझे भी सचिन तेन्दुलकर सबसे ज़्यादा पसंद है। उम्मीद है कि इस विश्व-कप में भी सचिन का जादू चलेगा।

प्रश्‍न कर्ता एक दिन के लिये आपको भारत का प्रधानमंत्री बना दिया जाये तो आप क्या करेगें।

प्रतीक जी एक दिन में कुछ नहीं होने का। भारत में करने और होने को बहुत कुछ है। वैसे भी हर समस्या का हल राजनीति और सत्ता के ज़रिए नहीं हो सकता है। बहुत-सी गम्भीर समस्याएँ हैं जिन्हें भिन्न स्तर पर हल करने की ज़रूरत है।

प्रश्‍न कर्ता आप आपने जन्म दिन को किस तरह मानाऐगें।

प्रतीक जी उसी तरह मनाऊँगा जैसे बाक़ी दिन मनाता हूँ और वैसे भी अपने लिए तो 'हर दिन होली रात दीवाली' है।

प्रश्‍न कर्ता आपके जिन्दगी मे प्यार के क्या मायने है?

प्रतीक जी इस सवाल को सुनकर लग रहा है कि मानो मैं कोई अभिनेता हूँ, क्योंकि अक़्सर ये सवाल फ़िल्मी पत्रकार अभिनेताओं से करते हैं। :-)
मेरा मानना है कि हर इन्सान की ज़िन्दगी में
प्यार की वही अहमियत होती है, जो हवा, पानी की होती है। प्यार के बिना ज़िन्दा रहना नामुमकिन है।

प्रश्‍न कर्ता आप अपने कैरियर मे किस क्षेत्र बनाना चाहते है?

प्रतीक जी फ़िलहाल तो सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ही अपना करियर बनाना चाहता हूँ। आगे रब जाने।

प्रश्‍न कर्त आपको हिन्दी ब्लाग का काम देव कहा जाता है तो कैसा लगता है? पाठक गण अक्सर आपके टाईमपास का इंतजार करते रहते है। कैसे खोजते है आप टाईम पास के इतने अच्छे साधन ? :)

प्रतीक जी अपनी तारीफ़ तो सभी को अच्छी लगती है, भले ही वह झूठी क्यों न हो। लेकिन मेरा मानना है कि लोगों को मुझे 'कामदेव' कहने से पहले यह भी सोचना चाहिए कि यह सुनकर कामदेव को कितना बुरा लगेगा।

लोग जो मनोरंजक ई-मेल मुझे फ़ॉरवर्ड करते हैं, उन्हीं को मैं टाइमपास पर चिपका देता हूँ। इसमें मेरी अपनी मेहनत और दिमाग़ का रत्ती भर भी नहीं है। सारा श्रेय उन लोगों का है जो अपना क़ीमती वक़्त लगाकर यह काम करते हैं।

प्रश्‍न कर्ता टाईमपास की कोई टिप्प्णी जो आपको अच्छी लगी हो और याद हो।

प्रतीक जी टाइमपास पर कई रोचक टिप्पणियाँ होती रहती हैं। किसी एक को चुनना बाक़ियों पर अन्याय करना होगा।

करीब तीन घन्‍टे बाद फिर मिलना हुआ और बात प्रारम्‍भ होती है।
प्रश्‍नकर्ता प्रतीक जी, प्रश्न तो आपको मिल गये होगें
प्रतीक हाँ, उन्हीं के उत्तर लिख रहा था :-)

प्रश्‍नकर्ता जी धन्यवाद, जो आप मेरा इतना सहयोग कर रहे है।
प्रतीक जी क्या मज़ाक कर रहे हो भाई। आप मेरा साक्षात्कार लेकर मुझे celebrity बना रहे हो, तो इतना करना तो बन ही पड़ता है। :-) (भीनी भीनी मुस्‍कराहट देते हुऐ)
प्रश्‍नकर्ता :-) प्रश्‍नकर्ता ने भी मुस्‍कराहट का रिपलाई किया।

कुछ देर बाद

प्रश्‍नकर्ता अभी कुल 20 प्रश्न हुऐ है 1 बाकी मुझे पूछना बाकी है।

फिर शुरू होता है दौर

प्रतीक जी : कौन-सा प्रश्न बाक़ी है भाई? पूछिए... 21 प्रश्नों के उत्तर देकर लगेगा कि पूरे 21 साल बेकार नहीं गए अबतक। कोई तो 21 प्रश्न पूछ रहा है :-)

(प्रश्‍नकर्ता भी हँसता है)

प्रश्‍न कर्ता 21 वॉं प्रश्न
कभी आपके जीवन मे दो रास्ते आये पहला चिठठाकारी दूसरा कोई और तो आप किसको चुनेने ?

प्रतीक जी यह तो पक्के तरीक़े से तभी कहा जा सकता है जब पता हो कि दूसरा रास्ता क्या है।

पर इसका उत्तर तो यह है कि ब्लॉगिंग को मैं अधिकांश चीज़ों की तुलना में कम महत्व देता हूँ। इसलिए छोड़ना पड़े तो शायद सबसे पहले ब्लॉगिंग ही जाएगी। :-)

आप रखने के लिये स्वतंत्र है
कैरियर, मित्र या जो आपकी प्रिय हो आप कन्फ्यूज है कया? :)

प्रतीक जी हाँ... समझ नहीं आ रहा कि किसे रखूँ दूसरी चीज़ की जगह पर :-)

me: एक प्रश्न और है, इसके अलवॉं जो कभी मै अपने विषय मे सोचता हूँ

प्रतीक जी कहिए... शायद वो कुछ सरल हो :-)

me: इसका उत्तर नही मिलेगा

?

प्रतीक जी इसका उत्तर तो यह है कि ब्लॉगिंग को मैं अधिकांश चीज़ों की तुलना में कम महत्व देता हूँ। इसलिए छोड़ना पड़े तो शायद सबसे पहले ब्लॉगिंग ही जाएगी। :-)

प्रश्‍न कर्ता 22वॉं प्रश्न था कि आपके पिता जी आपसे कहे कम्पयुटर, ब्लागिंग छोड दो, एक दम से कभी देखना भी मत तो आप ऐसा करेगें?

प्रतीक जी इस बारे में मेरा मानना थोड़ा अलग है क्योंकि मैं ज़्यादातर काम अपने सही-ग़लत की सोच के आधार पर करता हूँ

और मेरे हिसाब से अगर पिताजी ऐसा कहें, बिना किसी पुख़्ता वजह के, तो मैं शायद ब्लॉगिंग नहीं छोड़ूंगा :-) मैं बिना किसी ख़ास कारण के ब्लॉगिंग नहीं छोड़ता अगर मुझे ठीक लगेगा और महसूस होगा कि ब्लॉगिंग छोड़ना सही है, तभी छोड़ूंगा... अन्यथा नहीं।

इसी के साथ साक्षात्‍कार समाप्‍त होता है।

हम लोग पिछले 4 घन्‍टे से हो रही साक्षात्‍कार से मुक्‍त हो कर चर्चा मे तल्‍लीन होते है।

स्‍वयं आज इलाहाबाद मे एयर शो हुआ था वहॉं गया तो सब कुछ खत्म हो चुका था :)

प्रतीक जी ये तो गुगली हो गई :-)

स्‍वयं हा हा

वही यह फोटो ली थी नये यमुना पुल पर

प्रतीक जी अच्छा... नई तस्वीर है, इसीलिए इतने ख़ूबसूरत लग रहे हो

स्‍वयं आप तो बडी जल्दी खूबसूरती पहचान लिये

:)

आज मैने एक लेख पोस्ट किया था अभी तक बोहनी नही हुई

प्रतीक जी हम किए देते हैं, कड़ी दीजिए

स्‍वयं लगता है अबस भाई कखग भाई व तथद भाई सदमे से बाहर नही निकल पाये है। :-)

देता हूँ अमर बलिदानी बालक वीर हकीकत राय क्योकि टिप्प्णी करने मे ये ही भाई आगे रहते है।
प्रतीक जी हा हा... सही कहा :-)

प्रतीक जी प्रमेंद्र भाई, थोड़ी देर में बात करता हूँ। माताजी बुला रही हैं।

स्‍वयं ठीक है, यह जरूरी है, नमस्ते पुन: आपको जन्‍म दिन कि हार्दिक शुभकामनाऐ

प्रतीक जी नमस्ते धन्‍यवाद


कुछ कमी हो तो क्षमा किजियेगा




Mar 11, 2007

अमर बलिदानी बालक वीर हकीकत राय

पंजाब के सियालकोट मे सन् 1719 मे जन्‍में वीर हकीकत राय जन्‍म से ही कुशाग्र बुद्धि के बालक थे। यह बालक 4-5 वर्ष की आयु मे ही इतिहास तथा संस्‍कृत आदि विषय का पर्याप्‍त अध्‍ययन कर लिया था। 10 वर्ष की आयु मे फारसी पढ़ने के लिये मौलबी के पास मज्जित मे भेजा गया, वहॉं के मुसलमान छात्र हिन्‍दू बालको तथा हिन्‍दू देवी देवताओं को अपशब्‍द कहते थे। बालक हकीकत उन सब के कुतर्को का प्रतिवाद करता और उन मुस्लिम छात्रों को वाद-विवाद मे पराजित कर देता। एक दिन मौलवी की अनुपस्तिथी मे मुस्लिम छात्रों ने हकीकत राय को खूब मारा पीटा। बाद मे मौलवी के आने पर उन्‍होने हकीकत की शियतक कर दी कि इसने बीबी फातिमा* को गाली दिया है। यह बाद सुन कर मौलवी बहुत नाराज हुऐ और हकीकत राय को शहर के काजी के सामने प्रस्‍तुत किया। बालक के परिजनो के द्वारा लाख सही बात बताने के बाद भी काजी ने एक न सुनी और निर्णय सुनाया कि शरह** के अनुसार इसके लिये सजा-ए-मौत है या बालक मुसलमान बन जाये।माता पिता व सगे सम्‍बन्धियों के कहने के यह कहने के बाद की मेरे लाल मुसलमान बन जा तू कम कम जिन्‍दा ता रहेगा। किन्‍तु वह बालक आने निश्‍चय पर अडि़ग रहा और बंसत पंचमी सन 1734 करे जल्‍लादों ने, एक गाली के कारण उसे फॉंसी दे दी, वह गाली जो मुस्लिम छात्रो ने खुद ही बीबी फातिमा को दिया था न कि वीर हकीकत राय ने। इस प्राकर एक 10 वर्ष का बालक अपने धर्म और देश के लिये शहीद हो गया।

* मुहम्‍मद साहब की बेटी
** मुस्लिम कानून

Mar 8, 2007

एक पत्र - संघ और भ्रन्तियॉं

आज कल संघ के सम्‍बन्‍ध मे काफी चर्चा चल रही है, ऐसे मे बड़े भइया की डायरी मे रखे एक पत्र को यहॉं यथापव रखूँगा। जो संघ के बारे मे संक्षिप्‍त कहते हुऐ भी बहुत कुछ कहता है।


प्रिय मित्र,
संघ क्‍या है यह समझना और समझाना दोनो ही कठिन है, कोई इन्‍हे फॉंसीवादी कहता है तो कोई सम्‍प्रदायिकता फैलाने वाला संगठन। जितने प्रकार के लोग मिलते है उतनी प्रकार की तुलानाऐ की जाती है।ऐसे तुलना करने वाले किस प्रकार के थर्मामीटर का प्रयोग करते है यह विचार करने प्रश्‍न है। यदि वातारण की आद्रता नापने वाला है तो वह शरीर के ताप को कैसे सही बतायेगा, यदि कोई चाहे कि ट्रकों की माप करने वाले काँटे से एक किलो चीनी को कैसे तौला जा सकता है।
इसी प्रकार कुछ लोग पाँच किलों चीनी तौलने वाले तराजू से ट्रक को तौलने का प्रयास कर रहे है। कई वर्षो से संघ कार्य करने वाले लोगों से पूछता हूँ तो पाता हूँ कि उनके पास इस प्रश्‍न की जानकारी नही है कि संघ क्‍या ? किसी काम से मध्‍य प्रदेश के सतना जिले मे जाना हुआ, वर्षा के दिन थे, एक संघी भाई से भेंट हुई, जिज्ञासा वश उनसे मैनें यही दो प्रश्‍न किये---
1- संघ क्‍या है ?
2- आप मुसलमानों के सम्‍बन्‍ध मे इतना विद्वेश क्‍यों फैलाते है?

मैने जिनसे प्रश्‍न किया वे इंजीनियरिंग कालेज मे प्राध्‍यापक थे। पहले प्रश्‍न के उत्‍तर मे वे कहते है- मै भी करीब 10 वर्षों से इसी के शोध मे हूँ। दूसरे प्रश्‍न का उत्‍तर वे मंद मंद मुस्‍काराहट के साथ टाल गये। मुझे लगा कि प्रोफेसर साहब मेरे प्रश्‍न से बचना चाहते है, और मै विजेता सा भाव लिये प्रसन्‍न हो चुप रह गया।
वहॉं रहने दौरान ही प्रकृति का प्रकोप बरपाभयंकर वर्षा हुई। मै अपने कमरें मे बैठा वर्षा का आनन्‍द ले रहा था। तभी अचानक प्रोफेसर साहब आये और कहने लगे मेरे साथ चलो। उनके कहने मे कुछ जल्‍दी पन का भाव था अत: मैने भी बिना प्रश्‍न किये तहमत(लुंगी) उतार कर पैंट शर्ट पहन, छाता लेकर मै उनके सा‍थ हो दिया। रास्ते मे साथ चलते हुऐ उन्‍होने बताया कि कई इलाकों मे बाढ़ आई है, वहॉं आपकी सहायता की जरूरत है। यह वाक्‍या लगभग सुबह के पॉंच बजे का था। स्‍थान विशेष पर पहुचने पर पता चला कि यहाँ पर शायंकाल से ही सहायता चालू है।" जो मेरे आनन्‍द का विषय था कि वह किसी कि मृतयु और तबाही का कारण बनी हुई थी", जिनके कार्य व्‍यवहार को मै गालियॉं दिया करता था वे ही उन डूबतो के तिनके का सहारा बने थे। बुद्धि के तर्को का माहिर मै किंकर्तव्‍यविमूड़ बना सब कुछ देख रहा था। मुझे क्‍या करना चाहिये यह मेरी समझ मे नही आ रहा था? जिन्‍हे मै न जाने क्‍या क्‍या कहता था वो किसी माहिर खिलाड़ी की भातिं इस विपदा से भी खेल रहे थे, लोगों को काल के गाल से निकालने का काम कर रहे थे।
मुझे एक शिविर मे ले लाये जाने वाले लोगों के नामों की सू‍चीं बनाने तथा किसी की पूछतॉंछ मे सहायता करने को कहा गया था। मेरे द्वारा बनाई गई सूची और वहॉं काम करने वाले लोगों के भेदभाव रहित काम ने मुझे मेरे दूसरे प्रश्‍न का उत्‍तर दे रहे थे।
आपका
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Mar 7, 2007

हिन्‍दी चिठ्ठा जगत मे भूत

मैने कुछ समय पूर्व समीर लाल जी के ब्‍लाग पर अपनी टिप्‍पणी देखी थी, उस पर से मेरा नाम गायब था और आज फिर एक अपनी टिप्‍पणी देखी तो फिर से मेरा नाम गायब था। हिन्‍दी चिठ्ठाकारी में कोई जादूगर तो नही आ गया है। आज जो यह टिप्‍पणी देखी Anonymous said...

ज्‍यादा कुछ नही बस बढिया है। :)

दूसरी टिप्‍प्‍णी का उल्‍लेख नही कर रहा हूँ क्‍योकि वह विवादित है पर समीर लाल जी के ब्‍लाग परही है। :)

यह मेरी टिप्‍पणी थी पर मेरे नाम की जगह लिख गया Anonymous हो गया। क्‍या माजरा है इसका भी शोध होना चाहिये, कहॉं है नीलिमा जी (अन्‍यथा मत लिजियेगा), कही ब्‍लाग जगत मे भूत प्रेत तो नही आ गया है। कहॉं है ई-ओझा माफ कीजियेगा मतलब था ई-पडि़त से पूजा अनुष्‍ठान जो करवाना था, आज टिप्‍प्‍णी से ही नाम गायब हो रहा है कल को लेख, कविता और फोटो मे से गायब हुआ तो ............. !

Mar 6, 2007

महाशक्ति पर 319 हिट ! आखिर माजरा क्‍या था ?

मेरे ब्‍लाग पर 319 हिट हुई इसकी चर्चा काफी हुई। लिंकित मन पर निलिमा जी भी बरस पड़ी नारद रूपी जीतेन्‍द्र चौधरी जी पर कि कुछ गड़बड़ है। नीलिमा जी ने कई मुद्दे उठाऐ उन मुद्दों से मेरा कोई सरोकार नही है, पर मेरे ब्‍लाग पर 319 हिट के उत्‍तर के लिये मै बाध्‍य हूँ। बातता हूँ हुआ क्‍या:-

अचानक मै नारद पर पहुँचा देखा कि मेरे लेख के समाने हिट कम है।फिर मेरे मन मे आया कि हर व्‍यक्ति का अपना एक पाठक वर्ग होता है, जो अक्सर नारद पर से उसके ब्‍लाग पर जाता है। इस प्रकार कुछ के ब्‍लाग के समान रेटिंग ज्‍यादा होती है तो कुछ के सामने कम, पर मैने ऐसा महसूस किया कि जिनके लेख के सामने हिट ज्‍यादा होती है उनके ब्‍लाग पर अन्‍य लोग भी जाते है यह सोच कर कि शायद अच्‍छा लिखा हो इस कारण ज्‍यादा लोग गये होगें। इस प्रकार पाठक के मनोभाव पर असर पड़ता है और वह इस बहाने मैने आपने लेख के सामने अनगिनत क्लिक किया और विवादित होने का कारण बना। पर मैने जैसा सोचा था वैसा हुआ मुझे अपने इस लेख एक दिन मे सर्वाधिक पाठक पाने को भी मिले मेरे गणक के हिसाब से मैने 80 से ज्‍यादा पाठक पाये थे। अर्थात मैने पाठक के हृदय को परिवर्तिक करने मे सफलता भी पाई।
एक बात मै कहना चाहता हूँ कि नारद पर इस क्लिक रेटिंग से वि‍भिन्‍न ब्‍लागरों को दिक्‍कत का समना करना पड़ता होगा। अनूप जी, समीर जी भाटिया जी व जीतूजी आदिके लेखों पर अधिक क्लिक होते है, पर कुछ ब्‍लाग ऐसे है जिन पर एक भी क्लिक नही होता है नारद पर होने के बाद भी जैसा कि एक ब्‍लाग है जिस पर रामायण और महाभारत है।
अत: जीतू जी से अनुरोध है कि वे इस रेटिंग पद्धति की तरफ ध्‍यान दे, हो करे तो यह साप्‍ताहिक किया जा सकता है। जिससे कि पाठकों के मन पर किसी लेख के प्रति विपरीत प्रभाव न जाये।
नारद पर और क्‍या हो रहा यह मै नही जानता, किन्‍तु महाशक्ति पर 319 हिट के लिये जीतूजी या नारद जिम्‍मेदार नही हे।
मैने यह सब काफी सोच समझ कर, बिना किसी गलत उद्देश्‍य के लिये किया था। मैने अपने हिट सम्‍बन्‍धी बात को अपने लेख मे कहना चाहता था पर समयाभाव के कारण मै यह तत्‍काल न कर सका, क्‍योकि यह 26 फरवरी के बाद यह मेरा कोई लेख है ।


अब तो आप म‍हाशक्ति पर 319 चटकें की बात तो समझ ही गये होगें। :)