Dec 29, 2007

दो पारी में 8 शतक!

एक दो शतक तो आम बात हो गई है किन्‍तु जब दोनों पारी में कुछ मिला कर 8 शतक पड़े तो जरूर आश्‍चर्य की बात हो जाती है। एसा ही कुछ मेरे जीमेल एकाउन्‍ट के साथ हो रहा है। मेरे जीमेंल में pramendraps एकाऊंट के पर प्रतिदिन 50 से 70 तक स्‍पैम मैसेज आते है। जिनसे मेरा दूर दूर से परिचय नही रहता है। कल मैने अपने एकाउन्‍ट देखा तो पता चला कि इन बाँक्‍स में 100 तथा स्‍पैम बाक्‍स में 700 से ज्‍यादा मैसेज थे। चूकिं मै स्‍पैम को भी एक बार जरूर चेक करना पंसद करता हूँ क्‍योकि मुझे कई बार लगा है कि याहू से भेजा जाने वाला ईमेल अपने आप स्‍पैम बाक्‍स में चला जाता है। कभी कभी लगता है कि इस ईमेल को त्‍याग दूँ, किन्‍तु यह मैने कई जगह प्रयोग किया है तो मन भी नही कर पाता है। खैर जो होना था हो रहा है अब तो 8 शतकों की खुशियाँ मानने के अलावां कुछ किया भी क्‍या जा सकता है। :) किन्‍तु इन बाक्‍स के स्‍पैम चिन्‍ता का कारण जरूर है।


क्‍या आपके पास कोई समाधान है ?


Dec 28, 2007

सबका होल निचोड़ - क्‍योकि इन बंदरों का रंग भागवा न हो कर लाल था

गुजरात चुनाव में बहुतों ने बहुत कुछ बोल लिया है और मैने लगभग सभी को पढ़ा और सुना, किन्‍तु एक गन्‍दी बदबू लगभग सभी जगह पढने और सुनने को मिली कि हिटलर मोदी, साम्‍प्रदायिक मोदी। आज मुझे यह कहने में संकोच नही है कि पत्रकारिका की लगाम आज विदेशी ताकतो के हाथों गिरवी रखी जा चुकी है, और मीडिया भी विदेशी जुब़ान बोलने लगी है। यह मोदी का विरोध नही हो रहा है बल्कि राष्‍ट्रीयता का विरोध है। गुजराज चुनाव के दौरान काग्रेस बैकफुट पर रही और पत्रकारिता मुख्‍य विपक्षी दल के भूमिका में थी। कुछ ने मोदी को हिन्‍दुवादी कहा मै भी कहता हूँ किन्तु एक बात यह जरूर कहना चहूँगा कि सरकारे जो बनती है उनका कोई धर्म नही होता है अगर सरकारो हिन्दू या ..... का नाम दिया तो यह देश के व्‍यवस्‍था का अपमान है।


गुजराज में मोदी की जीत ने न सिर्फ भाजपा में जीतने का जज्‍बा दिखाया अपितु 2009 के आम चुनाव में भाजपा को मुख्‍य संघर्ष में भी ले आई। मेरे विचार से आज में आज अगर कोई लोकनायक नेता है तो सिर्फ मोदी ही है। जिस प्रकार काग्रेस के केन्द्रिय मंत्री दिनिशा पटेल को को 85 हजार से ज्‍यादा मतो से हराया यह कोई आम बात नही है वास्‍तव में यह लोक नायक के दर्जे को दर्शाता है। मोदी के नेतृत्‍व में भारतीय जनता पार्टी ने दर्शा दिया कि हमारे पास  भी एक पश्चिम बंगाल है जो सुशासन के बल पर भाजपा का अभेद दुर्ग बना हुआ है।


मै गुजरात और बंगाल की तुलना नही करूँगा क्‍योकि वे तुलनीय है भी नही। क्‍योकि एक ओर जहॉं सूरज उदित होता है तो दूसरी ओर अस्‍त होता है। आज बंगाल इसलिए नही रो रहा है कि वहॉं संसाधनों की कमी है इसलिये रो है कि वहॉं कि सरकार और मुख्‍यामंत्री निकम्‍मा है। आज मोदी के व्‍यक्तित्‍व के आगे हिन्‍दु और मुस्लिम दोनो प्रभावित है। जबकि बुद्धदेब की सरकार के गुर्गो ने ही नंदीग्राम के महिलाओं के साथ र्दुव्‍यवहार किया। ग़र मुसलमान मरता है तो देश का कुठित मानसिकता का एक बुद्धिजीवी कीड़ा रेगने लगता है तो यह भूल जाता है कि देश के इतिहास में दंगे पहली बार नही हुऐ, और यह जरूर हुआ है कि दंगो के बाद देश में पहली बार शान्ति जरूर हुई है। 84 के दंगे की विभीषिका आज भी जनता को याद है। किस प्रकार सिखों को काग्रेसियों ने चुन चुन कर मारा था। आज एक सिख प्रधानमंत्री ही दंगों के सरगना जगदीश टइटलर को अपने मंत्रीमंडल में जगह दियें हुऐ है। क्‍यो‍ नही काग्रेस से प्रश्‍न किया जाता कि क्‍यो बचा रही है अपराधियों को? यह प्रदेश प्रश्‍न पूछने वाला देश में को‍ई मीडिया नही है क्‍योकि विदेशी ताकतो के हाथ बिकी हुई है। नंदीग्राम में हिन्‍दु भी मारे गये और मुस्लिम भी, किन्‍तु देश के धर्मनिपेक्ष में अंधे बुद्धिजीवियों को यह नही दिखा क्‍यो ? क्‍योकि इन बंदरों का रंग भागवा न हो कर लाल था, यह हनुमान को नही लेनिन को पूजते है।


इधर एक लेख और देखने को मिला नरेंद्र मोदी की जीत और बेनज़ीर भुट्टो की हत्या एक ही जैसा दु:खद प्रसंग है! क्‍योकि इसमें पढ़ने लायक कुछ भी नही था। यह एक हास्‍यस्‍पद प्रसंग ही कहा जायेगा कि आज देश के विचारको में यह मत है। जिस प्रदेश की जनता ने मोदी को 48% वोट दे कर जिताती है उस जनता को ही जनता, गुनहगार मानती है। देश के आम चुनाव में काग्रेस 145 सीट लेकर जीत जाती है और भाजपा 138 सीट लेकर हारा माना जाता है तो यह देश का र्दुभाग्‍य ही है।


गुजरात की हार में न तो महारानी का कोई जिम्‍मेदारी थी न युवराज की, बस जिम्‍मेदारी थी स्‍थानीय टट्टूओं की, अगर यह जीत होती तो सारा श्रेय मैडम को जाता, हार हुई तो टट्टूओं की। और टट्टू जन कर भी क्‍या सकते है?  अपनी जिम्‍मेदारी लेने से मैडम की नजरों में कद ऊचा होगा, और जनता तो एक रखैल है जिससे तो समय पर ही काम पड़ेगा। यह कहना गलत न होगा कि काग्रेसी नेताओं का मैडम जी के साथ हिन्‍दू विवाह है और जनता के साथ मुस्लिम विवाह :)


गुजरात के बाद हिमाचल प्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी 2/3 बहुमत की ओर है अब यह कहना गलत होगा कि गुजरात जी एक तुक्‍का थी। गुजरात के बाद हिमाचल में हार की जिम्‍मेदारी किसकी होगी, जल्‍द की काग्रेस के पार्टी प्रवक्‍ता घोषणा करेगें। खैद वामपंथियों और छद्म पत्रकारों के सीने पर जरूर सॉप लोट जायेगा। 
और अब नरेन्‍द्र मोदी को उनकी जीत पर अपनी सर्वजनकि पहली बधाई देता हूँ।

मनुष्य तू बडा महान् है

धरती की शान तू भारत की सन्तान
तेरी मुठ्ठियों में बन्द तूफ़ान है रे
मनुष्य तू बडा महान है भूल मत
मनुष्य तू बडा महान् है ॥धृ॥

तू जो चाहे पर्वत पहाडों को फोड दे
तू जो चाहे नदीयों के मुख को भी मोड दे
तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड दे
तू जो चाहे धरती को अम्बर से जोड दे
अमर तेरे प्राण ---२ मिला तुझको वरदान
तेरी आत्मा में स्वयम् भगवान है रे॥१॥

---मनुष्य तू बडा महान है
नयनो से ज्वाल तेरी गती में भूचाल
तेरी छाती में छुपा महाकाल है
पृथ्वी के लाल तेरा हिमगिरी सा भाल
तेरी भृकुटी में तान्डव का ताल है
निज को तू जान ---२ जरा शक्ती पहचान
तेरी वाणी में युग का आव्हान है रे ॥२॥

----मनुष्य तू बडा महान् है
धरती सा धीर तू है अग्नी सा वीर
तू जो चाहे तो काल को भी थाम ले
पापोंका प्रलय रुके पशुता का शीश झुके
तू जो अगर हिम्मत से काम ले
गुरु सा मतिमान् ---२ पवन सा तू गतिमान
तेरी नभ से भी उंची उडान है रे ॥३॥
---मनुष्य तू बडा महान है

Dec 26, 2007

हँसना मना है

रामदयाल जी नें अपने आंगन शिवलिंग स्थापित कर, रोज़ पूजा की. एक दिन उनका 10 वर्षीय पुत्र आनंद पतंग उडा रहा था. पतंग आंगन में लगे झाड में फंस गई. जब सब कोशिश बेकार साबित हुई तब आनंद शिवलिंग पर चड ग़या जिससे उसे पतंग उतारने में आसानी हुई. रामदयाल जी खिडक़ी से यह सब देख झल्लाए और डांटते-चिल्लाते बाहर आए. आकर देखा भगवान शंकर प्रगट हैं. रामदयाल जी भगवान शंकर को दंडवत कर बोले, ''प्रभु, मैंने कई वर्षो से आपकी पूजा की परन्तु आपनें कभी दर्शन नहीं दिए!'' भगवान शंकर ठहरे भोले भंडारी, रामदयाल जी को बोले, ''पूजा-पाठ तो बहुत किया तुमनें पर हमें प्रसन्न करने हेतू केवल धतूरा, पुष्प और दूध ही चडाते रहे. आनंद को दर्शन हमनें इसलिए दिये क्योकि वह तो हम पर स्वयं ही चड ग़या.''

 

एक दिन एक आदमी काम के बजाय घर पर था और हर जगह दर्द महसूस कर रहा था. अगले दिन वह डॉक्टर के पास गया यह जांच कराने के लिए कि ये सब क्या है. अन्दर घुसने पर डॉक्टर ने उसकी परेशानी पूछी तब वह बोला- ''हर बार मेरा शरीर छूने से दर्द उठता है. जब मैं चेहरे को, हाथ को और पैरों को छूता हूं तो हमेशा दर्द होता है.'' डॉक्टर ने उसका एक्सरे लिया और वापस आकर बोला ''तुम्हारे साथ कोई समस्या नहीं है सिवाय इसके कि तुम्हारी उंगली टूटी हुई है.''

 

एक छोटी लडक़ी और एक छोटा लडक़ा खेल रहे थे.
लडक़ी लडक़े के पास पहुंची और बोली, ''टॉमी, 'घर' का खेल खेलोगे ?''
उसने कहा ,''हां ,क्यों नहीं. तुम मुझसे क्या करवाना चाहती हो?''
लडक़ी ने जवाब दिया ,'' मैं चाहती हूं तुम अपनी भावनाएं व्यक्त करो.''
''भावनाएं व्यक्त करूं ! '', परेशान से टॉमी ने कहा ,''मुझे पता नहीं इसका क्या मतलब होता है.''
लडक़ी व्यंग्य से मुस्कुरायी और बोली, ''बिल्कुल सही. तुम 'पति' बन सकते हो.''

 

एक आदमी ने अपने डॉक्टर को बताया कि अब वह घर में वो सब काम नहीं कर पाता जो वो पहले किया करता था. जब सभी परीक्षण पूरे हो गए तो वो बोला, '' डॉक्टर, मैं सह सकता हूं. आप मुझे सरल भाषा में बताइए कि बात क्या है?''
''सरल भाषा में कहा जाए'', डॉक्टर ने जवाब दिया, ''तो तुम केवल आलसी हो.''
''ठीक है'', आदमी ने कहा, ''अब मुझे कोई डॉक्टरी नाम बताइए जो मैं अपनी बीवी को बता सकूं.''

 

एक शेर की शादी थी.
उसकी बारात में एक चूहा जम के नाच रहा था.
यह देख कर जन्ता का फन्दा ही हिल गया.
इस चूहे को शेर की शादी में इतना मज़ा काहे को आ रहा है.
तब एक बन्दर ने चूहे से पूछा -
अबे, इतना क्यों नाच रहा है?
चूहा बोला - आज मेरे भाई की शादी है, नाचूं क्यों नही?
बन्दर बोला - चल हट, शेर और तेरा भाई!
चूहा बोला - मैं भी शादी से पहले शेर था''.

Dec 22, 2007

आज के क्रिकेटिया मूर्ख समाचार

Dec 17, 2007

मोदित्‍व

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जीतेगा मोदित्‍व -  जीतेगा हिन्‍दुत्‍व -  जीतेगी भारतीयता

Dec 15, 2007

अनोखी टेस्‍ट पोस्‍ट

आज यह टेस्‍ट पोस्‍ट कर रहा हूँ। एक प्रयोग के तौर पर काफी दिनों से ट्राई कर रहा था किन्‍तु सफलता हाथ नही लग रही थी किन्‍तु आज लगता है कि निराश नही होना पड़़ेगा, क्‍योकि कहते है न कि एक दिन आपका भी होता है।

  


 


 

प्रमेल्

Dec 13, 2007

मोदी एक मंत्र है

नरेन्‍द्र मोदी एक नाम होकर एक मंत्र हो गया है। न सिर्फ सर्मथक अपि‍तु असमर्थक भी अपने आपको मोदी महिमा के गुण गान से नही रोक पा रहे है। क्‍या बात हो गई कि एक व्‍यक्ति को कहा जा रहा है कि वह व्‍यवस्‍था पर भारी पड़ रहा है? अगर एक व्‍यक्ति पूरी व्‍यवस्‍था पर भारी पढ़ रहा है तो उसमें कुछ न कुछ तो बात जरूर होगी।

मै बात करूँ तो मै मोदी को तब से जानता हूँ जब वह भाजपा के राष्‍ट्रीय महासचिव हुआ करते थे, और मै मोदी को कभी पंसद नही करता था। जब गुजरात के मुख्‍यमंत्री के रूप में मोदी की ताजपोशी हुई तो मुझे कतई यह नेता अच्‍छा नही लगता था। कारण था कि मुझे मोदी की सूरत पंसद नही थी किन्‍तु बाद सीरत का कायल हो गया। आज यह नेता मुझे ही नही पूरे देश के युवाओं की आखों का तारा बन गया है। जो भी है वह मोदी के गुणगान कर रहा है। और होना भी चाहिए।

गोधरा के बाद जो कुछ गुजरात में हुआ वह वक्‍त की जरूरत थी। क्‍योकि गोधरा में जिस प्रकार 59 कारसेवक जिन्‍दा जलाये गये वह दृश्‍य दिल दहला देने वाला था। क्‍या हिन्‍दू के वोट के तरजू मे हिन्‍दू के प्राणों का मोल नही होता है? इन राजनितिज्ञों की चालों से तो यही लगता है। गुजरात दंगों के समय जो हाय तौबा मची उससे तो यही प्रतीत होता है कि राजनीति में वोट की ही कीमत है, तभी जाहिरा और शराहब्‍बुदीन का दर्द दिखता है किन्‍तु वही जलती हुई ट्रेन और सिक्‍ख का खुले आम कत्‍ले आम नही दिखता है। क्‍या वह दृश्‍य सोचा जा सकता है कि एक हज यात्रा की बस को जला दिया जाता? यह तो केवल एक प्रश्‍न है जबकि दृश्‍य आपके सामने ही प्रकट कर देते है। आगरा में बस की टक्‍कर से जिस प्रकार एक मुस्लिम छात्र की मौत हुई, उसके जवाब में आगरा में कई इलाकों की हिन्‍दू दुकानों को निशाना बना कर लूँट लिया गया, तथा इलाहाबाद में कुरान के पन्‍ने फाड़े जाने के षड़यत्र का खुद ही पर्दाफाश हो गया किन्‍तु इसके परिणाम स्‍वरूप अगर नुक्‍सान हुआ तो सिर्फ हिन्‍दूओं का कारण है कि सेक्‍यूलन पार्टियों की नज़र मे हिन्‍दू केवल जाति में बटी हुई नाजायद औलाद है जब मन चाहा बॉंट कर वोट ले लिया। मऊ की घटना सभी को याद है कि मुलायम की शह पर मारे गये तो सिर्फ हिन्‍दु। अगर बेस्‍ट बेकरी की बात करें तो उसमें मरने वाले हिन्‍दू ही थे। जाहिरा की आना कानी काफी सच कहती है कि सच क्‍या था?

आज उक्‍त बात यह बताती है कि गुजराज के हिन्‍दुओं ने बता दिया हिन्‍दुओं की ओर उठने वाली ऑंखे नोच ली जायेगी तो गलत क्‍या है? इतिहास गवाह है कि भाजपा के शासन के पहले जब काग्रेस का शासन था तो लगातार 10 वर्षो तक गुजरात सम्प्रदायिक दगें हुऐ किन्‍तु गुजरात दंगों के बाद पिछले साल 5 सालों में कोई दंगा नही हुआ इस मामले में एक वरिष्‍ठ पत्रकार कहते है कि गुजराज दंगो के बाद मुसलमान सहम गया है। अर्थात अगर दंगो की वजह से दंगें बन्‍द है तो क्‍यो न एक बार समर छिड़ जाने दे, कि दंगें हमेशा के लिये बन्‍द हो जाये? अगर गुजराज में आज समरसता है तो इसका कारण केवल और केवल मोदी है जो गुजराज में समाज के सन्‍तुलन को बरकारर कर दिया है। नही तो समाज के मुट्ठी भर लोग 85 प्रतिशत वाले भाग पर भारी पड़ते थे। और समय समय पर वैमन्‍यस्‍य फैलाते थे।

यही कारण है कि आज यत्र सर्वत्र मोदी मंत्रोच्‍चरण हो रहा है। और मोदी भाजपा पर भारी हो गये है। और यदि मोदी भाजपा पर भारी है तो कौन पिता का ख्‍वाब नही होता है कि उसके बेटे उससे बड़ा नाम हो? अब वह दिन दूर नही जब मोदी के नेतृत्‍व में दिल्‍ली के शासन में भगवा लहरायेगा। अब आज मोदी की प्रंशसा क्‍यो होनी चाहिए यह आप खुद तय कर सकते है ?

Dec 11, 2007

परमपूज्‍यनीय बाला साहब देवरस

जन्‍मदिवस पर विशेष - 11 दिसम्‍बर 1915

संघ के तृतीय सरसंघचालक परमपूज्‍यनीय मधुकर दत्‍तात्रेय देवरस उपाख्‍य श्री बाला साहब देवरस का जन्‍म तथा सम्‍पूर्ण शिक्षा नागपुर में हुई। बाल्‍यकाल में ही वे स्‍वयंसेवक बने और बीए, एलएलबी उत्‍तीर्ण करने के बाद प्रचारक बन गये।

परमपूज्‍यनीय श्रीगुरू जी के स्‍वर्गवास के बाद 6 जूल 1973 को सरसंघचालक के दायित्‍व को ग्रहण किया। उनके कार्यकाल में संघ कार्य को नई दिशा मिली। उन्‍होने सेवाकार्य पर बल दिया परिणाम स्‍वरूप उत्‍तर पूर्वाचल सहित देश के बनवासी क्षेत्रों के हजारों की संख्‍या में सेवाकार्य आरम्‍भ हुए।

सन् 1997 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर संघ पर प्रतिबन्‍ध लगा दिया। हजारों संघ के स्‍वयंसेवको को मीसा तथा डी आई आर जैसे काले कानून के अन्‍तर्गत जेलों में डाल दिया गया और यातनाऐं दी गई। परमपूज्‍यनीय बाला साहब की प्रेरण एवं सफल मार्गदर्शन में विशाल सत्‍याग्रह हुआ और 1977 में आपातकाल समाप्‍त होकर संघ से प्रतिबन्‍ध हटा।

स्‍वास्‍थ्‍य कारणों से जीवन काल में ही सन् 1994 में ही सरसंघचालक का दायित्‍व उन्‍होने परमपूज्‍यनीय प्रो. राजेन्‍द्र प्रसाद उपाख्‍य रज्‍जू भइया को सौप दिया। 17 जून 1996 को उनका स्‍वर्गवास हो गया।

आपकी बात बिना काट-छॉंट

मैने अपने पिछले लेख में आप सभी से वायदा किया था कि मेरे द्वारा आकुट के विभिन्‍न कम्‍यूनिटी में जो प्रश्‍न रखा गया था उसकी चर्चा मै आपके समक्ष जरूर लाऊँगा। आज से वह कड़ी प्रारम्‍भ हो रही है। इस चर्चा में मैने जस का तस प्रस्‍तुत कर रहा हूँ बिना किसी फेर बदल के, इस चर्चा को पढ़ कर जरूर एक युवा मस्तिष्‍क का अध्‍ययन का अच्‍छा अवसर मिला है। निश्चित रूप से यह चर्चा आज के नव भारत का निर्माण करने के सहायक होगी, क्‍योकि किसी का विचार कैसा भी हो किन्‍तु वह एक्टिव है तो निश्चित रूप से वह देश का भविष्‍य है।

 

क्‍या कहते है लोग हॉं या नही

sumit

jin hone mahatma gandhi ji ko rashtrapita swikaar nahi kiya hai unn logo ko india mein bhi rehne ka hukk nahi hai

 

हॉ

ankita

what type of poll is this??????
in Hrithik's commu????

 

clip_image002[10] नही

manu

some people think that mahatma gandhi was a great person but i dont think so i think he was one of the most corrupted person he never did any good work for country if any person talks about freedom that is only because of our freedom fighters he contributed nothing for country;s freedom

 

clip_image002[10] नही

Madhu

if he was selfish in his approach just for the sake of his revenge against the british then it was for the good of our country. so it was accpetable. it's not that im a fan of him, i hate him for allowing Bhagath Singh die, but on the other hand he did so much good that we cant deny him as RASHTRA PITA..

 

han  

The countdown

All those people who think no, and have some stupid reason to back it up should realise that it is because of him that they are able to sit in comfort and post stupid comments like that. Perhaps you should spend less time on the computers and read some real history. What i dont understand is when the whole world accepts his greatness, why do some 'Indians' have a problem with him?

clip_image002[14]

हॉ

SUSHANT

i cant say about gandhi ji
i RESPECT SARDAR BHAGAT SINGH AND SWAMI VIVEKANAND

 

clip_image002[10] नही

abhilasha

yes he deserves 2 be our father....this is a really stupid thinking......he was a gr8 man.....what he did 4r our country noone can do 4r anyone......i respect bhagat singh also...but that doesnt stop me frm respecting the greatest man on earth mahatama gandhi,,,,,,,

and u r absolutel right sumit...all those people hve no rights in stay in india......

clip_image002[14]

हॉ

manu

gandhi did nothing fr country what he did was only 4 himself he was selfish

clip_image001[9]

clip_image002[9] nahi  

Ăρσجắℓÿþ§€

saala khud chala gaya
aur jagte jagte DRY DAY karwa gaya haramkhor......

 

clip_image002[10]

नही

Đэשı₤ Đě§ρεЯаđΏ

i thinks this guy(Āρσجắℓÿþ§€)
is right..!!!

 

clip_image002[10] नही

ήДMяДŦД

no ways....
he's the one who ruined ur country n is no way responsible for our freedom.........
he's a bloody show of........
pakka polititian

 

clip_image002[10] नही

anil

He is responsible for what is happening in
J & K
WHY DID HE SAY " Jisko jana ha jaye... Jisko rehna hai rehey" partition (1947) should have been perfect.
Bloody Hell!!!

 

clip_image002[10] नही

Brajesh with

we should not comment like this on a national leader like this
he was a visionary
he was alegend
first collect some information and then post ur comments

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हॉ

Harshad

आपाका कहना पूरी तरा सही नहीं हें.
उनका सोचनेका तरीका थोडा गलत था.
सामनेवाला मारे तो 1 बार चुप रहो पर
वो 2 रिबार मारे तो उसे पलट के ऐसा
मारो की दुबारा न मारे.

 

clip_image002[10] नही

¸¸.•*´`*♥ॐAKashॐ

Gandhi was a diplomat . but he was not so evil as written in the poll . One cannot ruin his whole life just for gaining popularity .
yes he was a bit shrewd . but his ideas were great and they inspired the pple for struggle so he can be called The father of the nation proudly .

 

ÇrªŠŠ•™

he was a diplomat who was simply lucky,...........

 

clip_image002[10] नही

Vishu

ganhiji ke baare main itna kuch likha gaya hain ki shayad unki asli tasveer kahin chup gayi hain- unhe ek mashia ka darja diya gaya hain. in sab baton se hat ker agar dekhe to mera man a hain ki wo ek adarsh insaan the- unki sadgi, unka vyabhar- sab acha tha- isliyein mere hisaab se wo ek mahan aadmi the.
lekin aga hum politically dekhe to kehna mushkil hain ki kya sahi hain kysa galat- log kehte hain - unhone jo bhi decision liya wo galat tha- kya sare decission unhi ke the???? unke kai decission aise bhi the jinhe mana nahin gaya-jaise-
1. wo chate the ki indipendence ke baad congress natinal party na reh ker state party reh jaye- matlab national party ki jagah ab wo area party ban ker kaam kare. lekin aisa nahin hua.
2. wo chate the ki patel first PM bane- lekin nehru bane. agar aaj patel humare pehle PM hote to hum pata nahin kahan hote- shayad duniyan main america humse darta (jaise chaina se)
unki sirf yahi kami thi ki wo soft heart the- wo koi hard decission nahin le sakte the.
lekin unhone kabhi



हॉं  

m@ni$h:*style

ya obviously ... he gave us freedom ..... so in return we have 2 give him the position of a .... father of nation



हॉं  

UKF योगेश Yogesh

agar woo us waqat waha na hotey to azadi hummey jald hi mil jati aaur itna khoon bhi baha na hota.....................to the hell with the father of the nation..................



नही  

jay

Its very unfortunate who are against our father of nation they didn't ponder that whenever you want a cure the only method of cure is ahimsa the only way if he hadn't started his march with ahmisa we would have not got this freedom so early .....He deserves to be our father of nation and being a national i salute him with proud to him........



हॉं  

Sanjeev

Gandhi ek esa inshaan tha jo har us jagah tha jahan khoon kharaba hua. baki duniya mari par ek akela wo har baar bach gaya. mere khayal se gandhi to angrejo ka mideator tha.. uske pehle marne se sayad hum log pehle aajad ho jate.... jai natu ram godse

 
UKF Abhishek

uchiit hai yar
bapu hai hamre wo



हॉं  

vipin

gandhi was the man of great potential and grit,i think it is appropriate to call him bapu



हॉं  

जमशेदपुर मे

गान्धी जी कि जीवनी जानने के बाद नही



नही  

varuna

let us all not get so offended by whatever is written about gandhi ji.
everybody has his own perception nd after all gandhi ji was a human so it is very much possible for him to work for his own benifits. which he certainly did. whatever were his ideas can all be found in different religious books. nd we are some where ignoring the fact that he had cared the least for his followers. he had also made mistakes in his life nd learned through some of them. some mistakes which may be we had not or will not in our lives.



नही  

अन्‍य भाग भी जल्‍द ही प्रकाशित किये जायेगे।

Dec 10, 2007

इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय में तोड़ फोड़

एशिया के सबसे बड़े उच्‍च न्‍यायालय में भारतीय न्‍याय व्‍यवस्‍था पुन: शर्मसार हो गई।इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय में दोपहर माननीय न्‍यायमूर्तियों और एक महिला वकील के मध्‍य विवाद हुआ, और बाद में कुछ तोड़ फोड हुई। जिसके कारण न्‍यायालय ने काफी देर तक अपना काम काज स्‍थगित कर दिया। जिसके बाद न्‍यायालय परिसर भारी मात्रा में पुलिस के हवाले कर दिया गया।  वर्तमान समय में न्‍यायालय काम कर रही है। उक्‍त महिला अधिवक्‍ता को काफी अधिवक्‍ता घेर कर बैटे है। कुछ देर में पुन: अपडेट लेकर आऊँगा।

Dec 8, 2007

नये ब्‍लाग- नये ब्‍लागर

सभी एग्रीगेटरों से अनुरोध है कि निम्‍न ब्‍लागों में जो उनके मानकों पर हो उन्‍हे  अपने एग्रीगेटरों पर जगह देने का कष्‍ट करें। इनमें अधिकतर ब्‍लाग नये ब्‍लागरो के है, जो महाशक्ति समूह से जुडे हुऐ है।

Dec 2, 2007

औरत की यह मजबूरी है

तसलीमा से यह प्रश्‍न कि तसलीमा तुमने क्‍या किया ? हम और आप कौन है ? सेक्‍यूलर वाद की आड़ में गाहे वगाहे संप्रग & कम्‍पनी तमाशे का ढोल बजाती है। यह प्रश्‍न उनसे पूछना चाहिए कि "तुमने क्‍यों मजबूर किया" आदलती आदेश के बावजूद सरकार तस्लीमा देश में नही रह सकती उनकी किताब बेच नही सकती। मुझे कहने में हिचक नही है यह जो तंत्र चल रहा है वह किन्‍नरों का तंत्र है जिसका मुखिया अव्‍वल छक्‍का है। जो सरकार एक महिला के सम्‍मान की रक्षा नही कर सकती है। उस सरकार बने रहने का कोई अधिकार नही है।

एक मुस्लिम महिला से हम अपेक्षा ही क्या कर सकते है? जिसकी रक्षा सरकार भी नही कर सकती है। शाहबानों प्रकरण ने शिद्ध कर दिया। राजीव गांधी ने जिस प्रकार एक 62 वर्षीय महिला के पेट पर लात मारी वैसा कोई मुस्‍लमान ही कर सकता है। सच तो यही है कि राजीव गांधी भी तो असल औलाद मुसलमान की था। और आज भी उसी के वंशजों का ही शासन है। आज जो सरकार एक महिला अपना नेता बता कर सबसे बड़ा महिला हितचिंतक बनती है, वही तसलीमा और शाहबानों के नाम सेक्‍यूलर गुन्‍ड़ो के द्वारा आंतकित करती है। डायन भी सात घर छोड़कर बच्‍चो को खाती है किन्तु कुछ डायनों ने वोट की राजनीति के कारण अपने शिद्धान्‍त बदल दिये है।

तस्‍लीमा ने अपने किताब के जो पन्‍ने फाड़े है, वो पन्‍ने नही है बल्कि, भरें समाज में धर्मनिर्पेक्ष राष्‍ट्र के नेतृत्‍वकर्ताओं का बलात्कार किया है। और राष्‍ट्रीय शर्म की बात तो यह कि ये सेक्‍यूलर लोग अपने बलात्कार से खुश है। वैसे बलात्‍कार से खुश शायद ही कोई खुश होता हो ? मेरे विचार से शायद वेश्‍या भी नही। किन्‍तु आज एक महिला ने धर्मनिपेक्ष नपुंसकों का बलात्‍कार कर दिया। और ये खुश भी है। इन्‍हे किसकी संज्ञा दी जानी चाहिऐं।  

महाशक्ति समूह पर - अस्तित्‍व की खोज
Timeloss : समय नष्‍ट करने का एक भ्रष्‍‍ट साधन पर - तस्वीरों में हरिवंश राय बच्चन

Dec 1, 2007

अब कहे जाने योग्‍य कुछ नही है

आज मुझे अपने ब्‍लाग लेखन से काफी निराशा हुई,इससे ज्‍यादा किसी के लिये खराब बात क्‍या होगी जो स्‍वयं से निराश हो। जैसा कि मैने पिछले लेख में कुछ लिखा था और मैने जिस कारण से लिखा, परिणाम ठीक 180 अंश विपरीत मिला। परिणाम कुछ भी निकला, किन्‍तु तो निकला।

मेरी इस पोस्‍ट में प्रथम से लेकर अंत तक जितनी भी टिप्‍पणी रही, मैने हर टिप्‍पणी के पीछे अपने लेख को दो दो बार पढ़ा और टिप्‍पणी के भाव को समझने की कोशिस की, किन्तु मै असफल रहा।

मै बात को ज्‍यादा विस्‍तार नही दूँगा, अब कहे जाने योग्‍य कुछ नही है। किन्तु इतना जरूर प्रण करता हूँ कि अब मै किसी ब्‍लागर के बारे में कभी नही लिखूँगा। इस कड़ी मे यह मेरी अन्तिम पोस्‍ट है।

पिछले सभी सम्‍बन्धित पोस्‍टों में से, मै दिये गये नाम हटा रहा हूँ।मित्र वत व्‍यहवहार तक नामों का उल्‍लेख सम्‍भव रहेगा, किन्‍तु अब ब्‍लागर के रूप में  मेरी पोस्‍टों में किसी का नाम नही आयेगा।