Apr 28, 2008

ओए हँस ले

अगर आप बस पे चढे...
या फिर बस आप पे चढे...
दोनो मर्तबा टिकिट आपका ही काटता है।

 

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एक औरत दुसरी से: जब तेरा तलाक हुवा था तब तो एक ही बच्चा था और अब ३ कैसे?
दुसरी बोली: वो कभी कभी माफ़ी मँगाने आ जाते थे...

 

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एक दोस्‍त दूसरे दोस्‍त से कहता है -
तुम्हारी गर्ल फ्रेंड का एसएमएस मिला है,
कहती है कोई पत्थर से ना मारे मेरे दीवाना को,
इक्कीसवी सदी है बम से उड़ा दो साले को।

 

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रामू (डॉक्टर से)- डॉक्टर साहब! ये फूलों की माला किस के लिए?

डॉक्टर (रामू से)- ये मेरा पहला ऑपरेशन है, सफल हुआ तो मेरे लिए, नहीं तो तुम्हारे लिए।

 

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बंता: मेरी बीवी मुझे छोड़ के चली गई।
संता: तू उसका ख्याल नही रखता होगा।
बंता: अरे यार, सगी बहिन की तरह रखता था।

Apr 27, 2008

स्नातक शिक्षा उपधिधारियो से निवेदन

सभी स्नातक शिक्षा उपाधिधारी भाई बहनो से निवेदन है कि २८ अप्रैल को विधान परिषद चुनाव के लिए होने वाले मतदान में अपनी विचार धारा यानी अपने संघ के अनुसांगिक संगठन भाजपा के प्रत्याशियों के पक्ष में भारी संख्या में मतदान कराने का भरसक प्रयास करे और उन्हें विजयी बनवावे.

इलाहाबाद-झाँसी सीट से भाजपा के यज्ञदत्त शर्मा प्रत्याशी है, इस क्षेत्र में कुल ९०००० वोटर है लगभग १५००० वोट पर जीत संभव है. अतः आपसे निवेदन है कि भारी से भारी वोटो स विजयी बनाइये.

Apr 20, 2008

बोलो बजरंगबली की जय

 

मुझे एक बात नही समझ आ रही है कि 2006 में हनुमान जयंती अक्‍टूबर में पड़ी थी किन्‍तु इस बार अप्रेल में यह कैसे सम्‍भव है कि लगभगर 6 माह का अन्‍तर हो जाये। अक्‍टूबर में हिन्‍दी माह के अनुसार कातिक महिना होगा, जबकि अप्रेल में चैत्र चल रहा है।

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हनुमान जयंती पर मेरी पिछली पोस्‍ट - जय बजरंग बली तोड दुश्‍मन की नली

Apr 17, 2008

आज राष्ट्रीय शर्म दिवस है

आज भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन है। आज एक विदेशी देश की सरपरस्‍ती जाताने के लिये भारत सरकार क्‍या क्‍या दमन के तरीके अपना रही है। जिस मशाल का प्रर्दशन जनता न देख सके वैसे आयोजन से क्‍या लाभ? यह कहना गलत न होगा कि आज देश में विदेशी सत्‍ता की बू की झलक आ ही गई है।

आज मुझे मनमोहन नीत सरकार को, चीनी सरकार का ऐजेंट कहने में जरा भी हिचक नही है। एक तरफ तिब्‍बती जनता का दमन किया जा रहा है वही भारतीय सरकार चीन के जश्‍न में जाम पे जाम लिये जा रही है। आज की सत्‍ता की घिनौनी हरकत ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया है। एक पराये देश की दमन कारी नीति के सर्मथन में पूरी दिल्‍ली को कफ्यू ग्रस्‍त जैसा महौल कर दिया है। देश के गृहमंत्रालय भी ''चीनी मेहरिया'' (मशाल) के दर्शन कोई नागरिक न कर ले इस लिये,  सभी सरकारी इमारतों की राजपथ की ओर खुलने वाली खिड़कियां व दरवाजे बंद रहेंगे। पीएमओ, वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय भी राजपथ पर हैं इसलिए यह नियम उन पर भी लागू होगा।

कितनी शर्म की बात है कि यह प्रधानमंत्री कार्यालय से भी इस मशाल को दूर रखा गया, शायद सोनिया-मनमोहन सरकार को अपने कार्यालय पर ही भरोसा नही है। इस र्निलज्‍ज सरकार में कम से थोड़ा तो पानी रहा नही तो राष्‍ट्रपति भवन को भी न छोड़ते।

कई सितारों ने इस मशाल दौड़ का बहिष्‍कार किया वे बधाई के पात्र है सबसे अधिक भूटिया जिन्‍होने सरकार की नीति ही नही सरकारी नुमाइन्‍दों के मुँह पर खीच खीच के तमाचे मारे है। भूटिया स्‍पष्‍टता से कहा कि तिब्‍बती दमन के अपराधी के उत्‍सव में मै भाग नही लूँगा। भूटिया का कहना स्‍वाभाविक है वह सिक्किम से जुडे है जिसे चीन अपना अंग मानता है।

हमारी सरकार एक औरत के छत्रछाया में चूडि़यॉं पहन के बैठी है। इसके मंत्री अरूणाचल जाते है तो सिर्फ यह घोषण करने की ''अरूणाचल भारत का अभिन्‍न अंग है।''  अरूणाचल तो भारत का अंग है ही उसे बताने की क्‍या जरूरत है। मै सच में एक बात कहना चहाता हूँ कि अगर ऐसे मंत्री की सुरक्षा न हो तो अरूणाचल ही नही पूरे भारत में जूतियाये जाये। भारत का अंग वास्‍तव में सिक्किम और अरूणाचल तब होगे कि वहाँ पर कुछ काम हो। किन्‍तु काम के नाम पर इन ''नमक चोरों'' की जेब खाली हो जाती है। आज भी देश के दोनो प्रदेश रेल यातायात से अछूते है। क्‍या संसाधनों की कमी के बल पर भारत के अंग बनाये रखेगें?

 

चीन की मशाल न‍िकली जरूर है, इसमें तिब्‍बत का शौर्य जगेगा तो भारत का शर्म। 

Apr 14, 2008

इलाहाबाद चिट्ठकार मिलन - ब्‍लागरों बारात की तैयारी करो लड़का तैयार है

इलाहाबाद में आयोजित होने वाली पहली बहुपक्षीय चिट्ठाकार मिलना कार्यक्रम दूसरी बार टलने की सम्‍भावनाओं के मध्‍य अन्‍तोगत्‍वा आयोजित हो ही गई। कई दिनों पूर्व में श्रीराम चन्‍द्र मिश्र जी ने इलाहाबाद के सभी चिट्ठाकारों से मिलने का कार्यक्रम रखना चाह रहे थे। मै तो यह कार्यक्रम होली के मध्‍य अथवा बाद ही रखने का इच्‍छुक था किन्‍तु कार्यक्रम नही बन सका। मेरी कार्यक्रम 10 के बाद रखने की योजना बनी किन्‍तु इसके लिये मै तैयार नही था क्‍योकि मेरी विधि की परीक्षा की तारीख घोषित हो चुकी थी। पर जल्‍द ही वह तारीख स्‍थगित होने के बाद फिर आयोजन की आशा जगी। और कार्यक्रम बन ही गया।

 

सभी की राय जानकर पहली तिथि 12/4 फिर रामचन्‍द्र जी ने इसे बदलावाकर 13/4 की तेज दुपहरिया में कर दिया। मुझे इतनी तेज धूप में आयोजन का कोई औचित्‍य नही समझ नही आ रहा था किन्‍तु मेहमानों के बात सिरोधर्य कर आयोजक का कर्तव्‍य था। 13 की सुबह मैने चुंतन जी फोन लगया, किन्‍तु उन्‍होने अपनी धर्मपत्‍नी की गम्‍भीर बीमारी को बताया तो मन काफी दुखित हुआ और बस मन से यही निकला कि आप अपनी पत्नी की सेवा में लगे रहे ओर ईश्वर जल्‍दी उन्‍हे ठीक करें। उक्‍त बात फिर रामचन्‍द्र जी को बताई तो उन्‍होने बताया कि ज्ञान जी इसी कारण ज्ञान जी भी नही आ पायेगें। अन्‍त में कार्यक्रम को स्‍थगित कर फिर 14 की बात समाने आ गई कि 14 को हर्षवर्धन जी आ रहे है उन्‍हे भी शामिल कर लेते है। पर मै इस स्थिति में नही था क्‍योकि मेरे पास समय का आभाव था ही साथ साथ मैने अपने महाशक्ति समूह को पहले से बुला लिया था। मेरा यही उत्‍तर था कि मैने हर्ष जी को मेल कर दिया है कि उनके आने पर उनसे मिलने का कार्यक्रम पुन: तय हो जायेगा किन्तु बार बार कार्यक्रम रद्द करना ठीक नही है।  और फिर 11 बजे मिलने का कार्यक्रम तय हो गया।

 

जो भी पूर्व की योजना थी उसके अनुसार ताराचन्‍द्र जी 11.10 बजे तक आ चुके थे। और उसके बाद करीब 11.20 पर रामचन्‍द्र जी का भी आगमन हो गया। जब फिर पेशे से अधिवक्‍ता श्री देवेन्‍द्र प्रताप सिंह और मानवेन्‍द्र भी हाजिर हो गये। उसके बाद करीब 12.30 पर राजकुमार और शिव भी उपस्थित हए। इस प्रकार  महाशक्ति समूह के आधा दर्जन ब्‍लागर और रामचन्‍द्र मिश्र जी के मध्‍य विभिन्‍न विषयों पर काफी गरमारम वार्तालाप का आयोजन हुआ। कई प्रश्‍नों का आदान प्रदान हुआ।

 

रामचन्‍द्र जी ने सबको अपने अपने व्‍यक्तिगत ब्‍लागर पर लिखने को सलाह दिया किन्‍तु तारा चन्‍द्र जी ने प्रतिउत्‍तर में कहा कि हम एक है और महाशक्ति समूह में लिखने को तत्‍पर है। हमारा अपना ब्‍लाग भी है किन्‍तु महाशक्ति समूह के साथ खुश है। काफी वरिष्‍ठ ब्‍लागरों की चर्चा भी आयोजित हुई। हिन्‍दी ब्‍लागगिंग के भविष्‍य और महाशक्ति के अगले कार्यक्रम पर भी चर्चा हई। ताराचन्‍द्र जी ने बताया कि हम केवल ब्‍लागिंग ही नही समाज के अन्‍य सरोकारों से जुड़े हुऐ है चिट्ठकारी तो एक माध्‍यम है और उसे महाशक्ति की ओर से प्रमेन्‍द्र सम्‍हाल रहे है। साथ ही साथ विभिन्‍न प्रकार के आयोजनों के जरिये महाशक्ति स्‍थानीय मीडिया की सुर्खियों में रहती है।

 

अन्‍त में इस ब्‍लागर मीट के आयोजन के तीन घो‍षणाएँ गई। प्रथम यह कि हमारें राजकुमार अब नौकारी पेशा व्‍यक्ति हो गये है अर्थात उन्‍हे भारतीय रेलवे में जगह मिल गई है। कुछ दिनों से वे ज्‍वाईनिग के चक्‍कर लगा रहे है, कुछ आवाश्‍यक कागजों के लिये उनका इलाहाबाद मात्र 12 घन्‍टे के लिये इलाहबाद आना हुआ था और इसी 12 घन्‍टे में मेरे विशेष अनुरोध पर करीब 3 अमूल्‍य घन्‍टे हमारे साथ रहे। राजकुमार का नौकरी में आना हमारी युवा मंडली के लिये विशेष गौरव की बात है। यह इसलिये भी यह हमें एहसास दिलाता है कि अब महाशक्ति स्‍था‍यित्‍व की ओर बढ़ रही है। दूसरी घोषणा महाशक्ति के तकनीकि विशेषज्ञ श्री मानवेन्‍द्र प्रताप सिंह जी ने कि वह यह कि हमें गूगल की तरफ से आवाश्‍यक पिन मिल गया है। यह पिन हमारे लिये सिर दर्द बना हुआ था यह एक  ऐसी हड्डी थी जो न निगला जा सकता था न उगला। इस पिन प्राप्ति के बाद अब हमारे 234 अमेरिकी डालर  (13 अप्रेल तक) प्राप्‍त होने की काफी आशा हो गई है। चलते चलते मिश्र जी को अपने आवास का अवलोकन करवाया। उसी अवलोकर के दौरान उन्‍होने अपने कैमरे में '' 45 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान पर ब्‍लागरमीट आयोजन का सक्ष्‍य दर्ज किया। :) तीसरी घोषणा स्‍वयं राम चन्‍द्र मिश्र ने की कि जो अभी कॉल आया था वह लड़की वालों का था और मेरी शादी के लिये कार्यक्रम तय कर रहे है। तीनों घोषणा में सबसे ज्‍यादा ताली रामचन्‍द्र जी की इस घोषणा ने बटोरी। :)  तो क्‍या आप बरात के लिये तैयार है?

 

कहने को बहुत कुछ है किन्‍तु कहने का समय नही है जल्‍द ही फिर आपके सम्‍मुख उपस्थित रहूँगा।

 

जय श्रीराम

 

चित्र यहॉं है - 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के मध्‍य चित्र में इलाहाबाद ब्‍लागर मीट सौजन्‍य से श्री रामचन्द्र मिश्र

Apr 11, 2008

इलाहाबाद चिट्ठाकार मिलन में संशोधन

कल हुई घोषणा के बाद रामचन्‍द्र जी से कल बात हुई तो उन्‍होने बातया कि माता जी का फोन आया था और शनिवार को सब लोग मैहर देवी जी का दर्शन करने जा रहे है, इसलिये आम सहमति से कार्यक्रम में संशोधन किया जा रहा है। कार्यक्रम, समय और स्‍थान सभी वही है किन्‍तु दिन अब श्‍ानिवार की जगह रविवार हो गया है।

 

कार्यक्रम पूर्ण विवरण

प्रमेन्‍द्र प्रताप सिंह (महाशक्ति)

कार्यक्रम स्‍थल - 198 लूकरगंज(निकट मदनानी अस्‍पताल के पास) इलाहाबाद-01

समय - दोपहर 11 बजे से 1 बजे तक  (आम सहमति से कार्यक्रम तब तक चले)

दिन/दिनॉंक - रविवार/13.04.2008

Apr 10, 2008

इलाहाबाद चिट्ठाकार मिलन कार्यक्रम का आमंत्रण

इलाहाबाद चिट्ठाकार मिलन कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार हो गई है। मेरे निवास स्‍थल पर दिनॉंक 12/4/2008 को 11 बजे से 1 बजे तक का समय निर्धारण है। जो भी चिट्ठाकार बन्‍धु इलाहाबाद में रहते है और उनकी जानकारी मुझे थी मैने उन्‍हे व्‍यक्तिगत तौर पर आमंत्रित कर लिया। जिन्‍ह बन्‍धु या भगिनियों के बारे में मुझे जानकारी नही है, उन्‍हे क्षमा चाह कर, खुले निमंत्रण के द्वारा आमत्रित करता हूँ।

इस चिट्ठाकार मिलन कार्यक्रम के लिये, इलाहाबाद और आस-पास के ब्‍लागर बन्‍धु भी आंमत्रित है। इस कार्यक्रम के लिये इच्‍छुक चिट्ठकार बन्‍धु दिनॉंक 11/4/2008 की शाम 7 बजे तक मुझे इस नम्‍बर (9415034523) पर या रामचन्‍द्र मिश्र जी को (9919824795) पर सूचित करने का कष्‍ट कीजिए।

अभी तक इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिये निम्‍न नाम अनुमति प्रदान कर चुके है - सर्वश्री ज्ञानदत्‍त पान्‍डेय, श्री संतोष कुमार पान्‍डेय, श्री राम चन्‍द्र मिश्र, श्री देवेन्‍द्र प्रताप सिंह, श्री मानवेन्‍द्र प्रताप सिंह, श्री ताराचन्‍द्र गुप्‍ता, श्री शिवकुमार गुप्‍ता एवं मै स्‍वयं।

Apr 7, 2008

भारतीय मुस्लिम नेतृत्‍व - भय बिन प्रीत न होत गुंसाई

यह मुस्लिम नेता रोषपूर्वक अपने को सौ प्रतिशत भारतीय होने का दावा करते है। साथ ही साथ काश्‍मीर पर पाकिस्‍तान के दावे के पक्ष में तर्क देते सुने जाते है। आसाम में पाकिस्‍तानी काश्‍मीर घुसपैठियों को भारतीय मुसलमान मुस्लिम सिद्ध करते दिखाई देते है। कहने को उनका हिन्‍दुओं से कोई मनोमालिन्‍य नही किन्‍तु साथ ही साथ यह फतवा भी जारी करते है कि नेहरू के मृत्‍योंपरानत उनके शव के पास कुरान का पाठ इस्‍लाम के विरूद्ध है क्‍योकि काफिर के शव पर कुरान नही पढ़ी जा सकती। वह जाकिर हुसैन को भारत का राष्‍ट्रपति तो देखना चाहते है किन्‍तु अच्‍छा मुसलमान होने के नाते उनके हिन्‍दु में शपथ और शंकराचार्य से आशीर्वाद लेने प आपत्ति करते है।

प्रस्‍तुत वाक्‍य हामिद दलवई के है जो मुस्लिम पालिटिक्‍स इन सेक्‍युलन इंडिया, पृ. 47  से उद्धत है। इस वाक्‍य से मु‍सलिम नेतृत्‍व की का सही रूप सामने दिखता है। जो नेहरू की मृत्‍यु से लेकर आज तक की सत्‍ता सर्घष में हावी है। यह कांग्रेस उसी म‍ुसलिम कौम को उठाने का असफल प्रयास कर रही है जो अपनी रूढि़ विचारों से कभी नही उठ सकती है। सोनिया को लगता है कि वह 18 प्रतिशत मुसलमानों के बल पर वह चुनाव जीत लेगी तो यह उनकी सबसे बड़ी राजनैतिक अ‍परपिक्‍वता की निशानी है, वह दिन दूर नही जब राष्‍ट्रवाद का स्‍वाभिमान जागृत होगा और देश में राष्‍ट्रवाद के नेतृत्‍व की सरकार आयेगी। और तब देश में न सिर्फ मुसलमान उन्‍नति करेगा अपितु पूरा देश उन्‍नति करेगा। जरूरत है उग्रता को सोंटा दिखने और सही मार्ग पर ले चलने की। क्‍योकि कहा गया है - भय बिन प्रीत न होत गुंसाई।

Apr 5, 2008

गूगल पर प्रतिबन्‍ध तो नही लग गया है ?


आज इलाहाबाद में मध्‍य दोपहरियॉं के बाद से गूगल, जीमेल, आरकुट, ब्‍लागर, ब्‍लागवाणी सहित अनेकों साईट को झटका लग गया है। आज दोपहर में बहुत तेज आँधी आई और पानी भी बरसा और इन साईटों पर काफी असर पड़ा। यह प्रभाव सिर्फ इलाहाबाद भर में था या विश्‍वव्‍यापी असर था यह अभी जानकारी नही मिल पाई है। अभी रात 9 बजे रामचन्‍द्र मिश्र जी से पूछा कि क्‍या हाल-चाल है गूगल के? तो उत्‍तर बदहाली के ही मिले ओर पता चला कि याहू भी संकट में है। काफी साईटे काफी तीव्रता से खुल रही है, किन्‍तु कुछ साईटों का न खुलना समस्‍या का विषय है। कहीं यह गूगल समूह पर प्रतिबन्‍ध तो नही ?


अभी के लिये इतना ही ..............




यह पोस्‍ट ब्‍लाग राईटर से कर रहा हूँ, पता नही होती है कि भी नही ?


गूगल पर प्रतिबन्‍ध तो नही लग गया है ?


आज इलाहाबाद में मध्‍य दोपहरियॉं के बाद से गूगल, जीमेल, आरकुट, ब्‍लागर, ब्‍लागवाणी सहित अनेकों साईट को झटका लग गया है। आज दोपहर में बहुत तेज आँधी आई और पानी भी बरसा और इन साईटों पर काफी असर पड़ा। यह प्रभाव सिर्फ इलाहाबाद भर में था या विश्‍वव्‍यापी असर था यह अभी जानकारी नही मिल पाई है। अभी रात 9 बजे रामचन्‍द्र मिश्र जी से पूछा कि क्‍या हाल-चाल है गूगल के? तो उत्‍तर बदहाली के ही मिले ओर पता चला कि याहू भी संकट में है। काफी साईटे काफी तीव्रता से खुल रही है, किन्‍तु कुछ साईटों का न खुलना समस्‍या का विषय है। कहीं यह गूगल समूह पर प्रतिबन्‍ध तो नही ?


अभी के लिये इतना ही ..............




Technorati :

Apr 3, 2008

हिन्‍दू विवाह

 

 

हिन्‍दू विवाह एक संस्‍कार हुआ करता था किन्‍तु भारत सरकार के द्वारा हिन्‍दू‍ विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार अब न यह संस्‍कार है और न ही संविदा। अपितु यह दोनो का समन्‍वय हो गया है। भारत सरकार के इस अधिनियम से निश्चित रूप से हिन्‍दू भावाओं को आधात पहुँचा है क्‍योकि यह हिन्‍दू धर्म की मूल भावानाओं का अतिक्रमण करता है तथा संविधान की मूल भावनाओं का उल्‍लंघन करता है।

हिन्‍दू विवाह जहॉ जन्‍मजन्‍मान्‍तर का संबध माना जाता था इसे एक खेल का रूप दे दिया गया है तथा हिन्‍दुओं की प्रचीन पद्धति को न्‍यायालय को मुहाने पर खड़ा कर दिया गया, जिसे परमात्‍मा भी भेद नही सकते थे। महाभारत में स्‍त्री पुरूष का अर्ध भाग है तथा पुरूष बिना स्‍त्री के पूर्णत: प्राप्‍त नही कर सकता है। धर्म के लिये पुरूष तथा उपयोगी होता है जबकि उसके साथ उसकी धर्म प‍त्‍नी साथ हो, अन्‍यथा पुरूष कितना भी शक्तिशाली क्‍यो न हो वह धर्मिक आयोजनों का पात्र नही हो सकता है।

रामायण में भगवान राम भी सीता आभाव में धर्मिक आयोजन के योग्‍य नही हु‍ऐ थे। रामायण कहती है कि पत्नी को पति की आत्‍मा का स्‍वरूप माना गया है। पति अपनी पत्नि भरणपोषण कर्ता तथा रक्षक है।

हिन्दू विवाह एक ऐसा बंधन है जिसमें जो शरीर एकनिष्‍ठ हो जाते है, किन्‍तु वर्तमान कानून हिन्‍दू विवाह की ऐसी तैसी कर दिया है। हिन्‍दू विवाह को संस्‍कार से ज्‍यादा संविदात्‍मक रूप प्रदान कर दिया है जो हिन्‍दू विवाह के स्‍वरूप को नष्‍ट करता है। हिन्‍दू विवाह में कन्‍यादान पिता के रूप में दिया गया सर्वोच्‍च दान होता है इसके जैसा कोई अन्‍य दान नही है।

विवाह के पुश्‍चात एक युवक और एक युवती अपना वर्तमान अस्तित्‍व को छोड़कर नर और नारी को ग्रहण करते है। हिन्‍दू विवाह एक बंधन है न की अनुबंध, विवाह वह पारलौकिक गांठ है जो जीवन ही नही मृत्‍यु पर्यन्‍त ईश्‍वर भी नही मिटा सकता है किन्‍तु भारत के कुछ बुद्धि जीवियों ने  हिन्‍दू विवाह की रेड़ मार कर रख दी है इसको जितना पतित कर सकते थे करने की कोशिश की है। भगवान मनु कहते है कि पति और पत्नि का मिलन जीवन का नही अपितु मृत्‍यु के पश्चात अन्‍य जन्‍मों में भी य सम्‍बन्‍ध बरकरार रहता है। हिन्‍दू विवाह पद्धिति में तलाक और Divorce शब्‍द का उल्‍लेख नही मिलता है जहॉं तक विवाह विच्‍छेन का सम्‍बन्‍ध है तो उसे शब्‍द संधि द्वारा बनाया गया। अत: हिन्‍दु विवाह अपने आप में कभी खत्‍म होने वाला सम्‍बन्‍ध नही है।

वयस्‍कता प्राप्‍त करने पर,संतानों को मनमानी करने का फैसला निश्चित रूप से हिन्‍दू ही नही अपितु पूर भरतीय समाज के लिये गलत था। क्‍या मात्र 18 वर्ष की सीमा पार करने पर ही पिछले 18 वर्षो के संबध की तिलाजंली देने के लिये पर्याप्‍त है? है

1914 के गोपाल कृष्‍ण बनाम वैंकटसर में मद्रान उच्‍च न्‍यायाल ने हिन्‍दु विवाह को स्‍पष्‍ट करते हुये कहा कि हिन्‍दू विधि में विवाह को उन दस संस्‍कारों में एक प्रधान संस्‍कार माना गया है जो शरीर को उसके वंशानुगत दोषों से मुक्‍त करता है।

इस प्रकार हम देखेगें तो पायेगें कि हिन्‍दू विवाह का उद्देश्‍य न तो शारीरिक काम वासना को तृप्‍त करना है वरन धार्मिक उद्देश्‍यों की पूर्ति करना है। आज हिन्‍दू विवाह को कुछ अधिनियमों ने संविदात्मक रूप प्रदान कर दिया है तो हिन्‍दू विवाह के उद्देश्‍यों को छति पहुँचाता है।

अभी बातें खत्‍म नही हुई और बहुत कुछ लिखना और कहना बाकी है। समय मिलने पर इस संदर्भ में बाते रखूँगा।