काला पानी जाने वाले जहाज पर डकैत और खूनी लोगो के साथ सावरकर जी को क अँधेरे कमरे में रखा गया। सौ से अधिक लोग वही एक कमरें मे कैद थे। सभी के स्वच्छतागृह की व्यवस्था नही थी। जिस कोने मे मल का ड्रम भरा था उसी के पास सावरकर जी को बिस्तर डालना पड़ा। दुर्गन्ध के कारण उनकी नींद हराम हो गई। उनकी बेचैनी देखकर एक घुटा हुआ कैदी उनसे बोला.. बड़े भैया हम लोगों को इसकी आदत सी पड़ गई है। आप उस कोने मे सोइये.. वहाँ भीड़ जरूर है पर गन्दगी नही है... यह मै सो जाता हूँ.. आप मेरी जगह जाइये।
उसकी इस बात को सुनकर सावरकर जी बड़े प्रभावित हुए और बोल उठे... धन्यवाद ! सभी को नाक है और नाक है तो बदबू तो आयेगी ही। आपको भी परेशानी होगी। अब तो मुझे भी काले पानी की सजा भुगतनी है तो मुझे भी ऐसी बातों की आदत करनी ही पड़ेगी.. और यह कह कर यात्रा के अंत तक सावरकर जी वही रहे।
इस प्रेरक प्रसंग से हमे यह शिक्षा मिलती है कि कोई कैसा भी हो.. उच्च वर्गीय य मध्यमवर्गीय सभी को एक समान समझना चाहिये... परिस्थितियाँ कैसी भी हो हमे परिस्थिति के अनुसार ही आपने को ढालना चाहिये।
Aug 9, 2011
Aug 6, 2011
एग्रीगेटर बिन चिट्ठाकारी..
हिन्दी चिट्ठाकारी आज अपने परिपक्व रूप मे है। मुझे नही पता कि कि आज के समय मे चिट्ठाकारो के लिये एग्रीगेटर कितना उपयोगी है कि नही क्योकि मुझे यह भी जानकारी नही है कि कौन कौन से एग्रीगेटर वर्तमान समय है और उनकी स्थिति क्या है ?
नारद युग की बादशाहत को जिस प्रकार ब्लागवाणी ने तोड़ा और चिट्ठाजगत की चुनौतियो को स्वीकार करते हुये अपना वर्चस्व कायम रखा वकाई यह तारीफ कबिल था। ब्लागवाणी के जाने के क्या कारण थे यह आज तक जग-जहिर न हो सके..और ब्लागवाणी की वापसी के सारे प्रयास व्यर्थ होने के साथ ब्लागवाणी युग का अवसान हो गया। ब्लागवाणी अवसान के बाद निश्चित रूप से चिट्ठाजगत के पास हिन्दी चिट्ठाकारी प्रसारकर्ता के रूप मे आधिपत्य धारण करने का अवसर था किन्तु ब्लागवाणी के जाने के बाद चिट्ठाजगत का मौन पतन नव ब्लागरो के लिये दु:खद रहा।
ब्लागवाणी और चिट्ठाजगत के जाने के बाद एग्रीगेटरो की स्थिति मेरे संज्ञान मे नही है.... वर्तमान मे कौन-कौन से हिन्दी एग्रीगेटर काम कर रहे है। क्योकि ब्लागवाणी और चिट्ठाजगत का अंत हुये एक साल हो रहे है इस एक साल मे मेरे ब्लाग पर किसी भी एग्रीगेटर से कोई पाठक नही आये..... यह भी यक्ष प्रश्न है कि कि कोई एग्रीगेटर है भी अथवा नही ? अगर है तो उन एग्रीगेटरो मे शामिल होने की प्रक्रिया क्या है ?
इतने दिनो बाद एग्रीगेटर की बात क्यो छेड़ी गई यह वकाई सोचनीय प्रश्न है। इसका सबसे प्रमुख कारण यह है कि एग्रीगेटर से हटने के कारण नये ब्लागो और ब्लागरो से सम्पर्क स्थापित न हो पाना, ब्लाग जगत की नवीन हलचलो से अनिभिज्ञ्यता प्रमुख है।
किसी को वर्तमान समय मे सक्रिय एग्रीगेटर के बारे मे जानकारी हो तो देने का कष्ट करे।
नारद युग की बादशाहत को जिस प्रकार ब्लागवाणी ने तोड़ा और चिट्ठाजगत की चुनौतियो को स्वीकार करते हुये अपना वर्चस्व कायम रखा वकाई यह तारीफ कबिल था। ब्लागवाणी के जाने के क्या कारण थे यह आज तक जग-जहिर न हो सके..और ब्लागवाणी की वापसी के सारे प्रयास व्यर्थ होने के साथ ब्लागवाणी युग का अवसान हो गया। ब्लागवाणी अवसान के बाद निश्चित रूप से चिट्ठाजगत के पास हिन्दी चिट्ठाकारी प्रसारकर्ता के रूप मे आधिपत्य धारण करने का अवसर था किन्तु ब्लागवाणी के जाने के बाद चिट्ठाजगत का मौन पतन नव ब्लागरो के लिये दु:खद रहा।
ब्लागवाणी और चिट्ठाजगत के जाने के बाद एग्रीगेटरो की स्थिति मेरे संज्ञान मे नही है.... वर्तमान मे कौन-कौन से हिन्दी एग्रीगेटर काम कर रहे है। क्योकि ब्लागवाणी और चिट्ठाजगत का अंत हुये एक साल हो रहे है इस एक साल मे मेरे ब्लाग पर किसी भी एग्रीगेटर से कोई पाठक नही आये..... यह भी यक्ष प्रश्न है कि कि कोई एग्रीगेटर है भी अथवा नही ? अगर है तो उन एग्रीगेटरो मे शामिल होने की प्रक्रिया क्या है ?
इतने दिनो बाद एग्रीगेटर की बात क्यो छेड़ी गई यह वकाई सोचनीय प्रश्न है। इसका सबसे प्रमुख कारण यह है कि एग्रीगेटर से हटने के कारण नये ब्लागो और ब्लागरो से सम्पर्क स्थापित न हो पाना, ब्लाग जगत की नवीन हलचलो से अनिभिज्ञ्यता प्रमुख है।
किसी को वर्तमान समय मे सक्रिय एग्रीगेटर के बारे मे जानकारी हो तो देने का कष्ट करे।
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