tag:blogger.com,1999:blog-30482424.post-46810331626549416702008-03-18T21:16:00.001+05:302008-03-18T21:20:13.046+05:30सुभाषित<p>दातव्‍यमिति यद्दानं दीयतेSनुपकारिणे।</p> <p>देश काले च पात्रे च तद्दानं सात्विक स्‍मृतम्।।  श्री म.भ.गीता 17/20 </p> <h3>भावार्थ -</h3> <p> दान देना ही कर्त्तव्‍य है, ऐसे भाव से जो दान देश तथा काल और पात्र के प्राप्‍त होने पर अउपकार न करने वाले के प्रति दिया जाता है, वह दान सा‍त्विक कहा गया है। </p> <p>शुभाषित, अमृत वचन</p> <div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/30482424-4681033162654941670?l=mahashakti.bharatuday.in'/></div>Manvendra Pratap Singhnoreply@blogger.com3